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तेजस्वी की 'मिल्क मार्केट' मुहीम को झटका, पटना का दूध बाजार निकला फर्जीवाड़े का अड्डा

पटना का दूध मार्केट कल से बिहार के सियासी गलियारे में सुर्खियां बटोर रहा है. अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत पटना जिला प्रसासन ने दूध मार्केट पर बुलडोजर चला दिया. 

 तेजस्वी की 'मिल्क मार्केट' मुहीम को झटका, पटना का दूध बाजार निकला फर्जीवाड़े का अड्डा
दूध मार्केट से फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर ने बडी तादाद में पैराआक्साईड केमिकल बरामद किया है.

पटना: जिस दूध मार्केट को बचाने के लिए तेजस्वी यादव ने आठ घंटे तक धरना दिया उसकी सच्चाई चौकानेवाली है. दूध मार्केट में धड़ल्ले से सेहत के साथ खिलवाड़ का अभियान चल रहा था. अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत हटाये गये दूध मार्केट से फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर ने बडी तादाद में पैराआक्साईड केमिकल बरामद किया है. जिसके बाद सवाल ये उठने लगे हैं कि क्या तेजस्वी यादव दूध के नाम पर गलत धंधा करनेवालों को बचाने के लिए सडक पर उतरे थे.

पटना का दूध मार्केट कल से बिहार के सियासी गलियारे में सुर्खियां बटोर रहा है. अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत पटना जिला प्रसासन ने दूध मार्केट पर बुलडोजर चला दिया. जिसका दूध मार्केट के दुकानदारों ने जमकर विरोध किया. बाद में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव भी दूध मार्केट के दुकानदारों के समर्थन में धरना पर बैठे. लेकिन पटना जंक्शन पर ध्वस्त किये गये दूध मार्केट की हकीकत जानकर आपके होश उड जाएंगे.

 

पटना जंक्सन के दूध मार्केट में वर्षों से कालाबाजारी का खेल चल रहा था. बुद्धवार को पटना स्टेशन से हटाये गये दूध मार्केट से फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने दस किलो हाईड्रोजन पैरॉक्साईड बरामद किया है. इस केमिकल का इस्तेमाल दूध को ज्यादा दिनों तक प्रिजर्व रखने के लिए किया जाता है. पटना जिले के फूड इन्सपेक्टर अजय कुमार की माने तो ये केमिकल सेहत के लिए खतरनाक है. ज्यादा मात्रा में शरीर में गया केमिकल का डोज कैंसर की बड़ी वजह बन सकता है.

इतना ही नहीं दूध मार्केट में कालाबाजारी की कहानी इससे भी कहीं ज्यादा है. फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीम कभी भी इस दूध मार्केट में जांच के लिए नहीं जा सकी. क्योंकि यहां दबंग लोगों का कब्जा है जिनका सीधा पॉलिटिकल कनेक्शन है. मजबूरन दूध की गुणवत्ता की जांच यहां कभी नहीं हो सकी. फूड इन्सपेक्टर अजय कुमार बताते  हैं कि उन्होंने कई बार दूध के गुणवत्ता की जांच के लिए दूध मार्केट में जाने की कोशिश की लेकिन वहां के दुकानदार लाठी डंडे और पत्थरों से उनपर हमला बोल देते हैं. कभी उन्हें मार्केट के अंदर जाने नहीं दिया गया. पीछले साल पुलिस के सहयोग से फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने तीन सैंपल मार्केट से लिये थे. जिसमें दो सैंपल फेल कर गये थे.

पटना दूध मार्केट की सच्चाई हैरान करनेवाली है. मार्केट में न तो कभी मीडिया को जाने की अनुमति मिली और न ही फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारियों को . लेकिन जब ये मार्केट टूटा तब तेजस्वी यादव इसका विरोध करने जरुर पहुंच गये. क्योंकि ये मार्केट लालू प्रसाद के सीएम रहते बना था. दूध मार्केट की सच्चाई जब आरजेडी नेता विजय प्रकाश से सवाल पूछा गया तो उनका जवाब चौकानेवाला था. आरजेडी नेता कहते हैं कि एक दो की सजा सबको क्यों. अगर मार्केट में गडबडी हो रही थी तो मामला जांच का बनता है. बिना नोटिस और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के मार्केट को तोडना सही नहीं है. सरकार के तनाशाही रवैये की वजह से 2 लाख परिवारों पर आज रोजी रोटी का संकट आ गया है.

इधर दूध मार्केट को लेकर तेजस्वी यादव के धरने पर सियासत भी तेज हो गयी है. मंत्री नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव की फैसले पर सवाल खडे किये हैं. नीरज कुमार ने कहा है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर पटना में अतिक्रमण हटाओं अभियान चल रहा है. ऐसे में संवैधानिक पद पर बैठे सख्स से न्यायालय के सम्मान की उम्मीद तो की ही जा सकती है.

पटना के कमिश्नर के आदेश पर दूध मार्केट से बरामद केमिकल को जांच के लिए लैब भेज दिया गया. जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई भी तय मानी जा रही है. वैसे दूध दुकानदारों के विरोध और मामले का राजनीतिकरण होता देख पटना नगर निगम की ओर से तोडे गये दूध मार्केट के विकल्प में अलग से मार्केट की व्यवस्था करने का लिखित आश्वासन दे दिया गया है.