बिहार में खेल के साथ ही हो गया खेल, जिस मैदान का CM ने किया उद्घाटन, अब गायब है फाइल

उसकी लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगता है कि जिस ह़की एस्ट्रोटर्फ का उद्घाटन साल 2011 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों हुआ था उससे संबंधित रिकॉर्ड ही कला, संस्कृति और युवा विभाग के पास नहीं है. 

बिहार में खेल के साथ ही हो गया खेल, जिस मैदान का CM ने किया उद्घाटन, अब गायब है फाइल
बिहार में खेल के साथ ही हो गया खेल, जिस मैदान का CM ने किया उद्घाटन, अब गायब है फाइल.

पटना: आज राष्ट्रीय खेल दिवस है यानी वो दिन जिस दिन खिलाड़ियों के योगदान को सरकार याद करती है और खेल के साथ खिलाड़ियों के उत्थान के लिए भी नई योजनाओं का ऐलान करती है. बिहार में खेल की बद्तर स्थिति किसी से छिपी नहीं है. हॉकी हो या फिर क्रिकेट सच्चाई ये है कि अवसर नहीं मिलने के कारण खिलाड़ियों दूसरे राज्य अपना जौहर दिखाने चले गए. 

बिहार में खेल को लेकर लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस हॉकी एस्ट्रोटर्फ मैदान का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने किया था, उससे संबंधित फाइल ही कला संस्कृति विभाग के पास अब नहीं है. 

राजधानी में राजेंद्र नगर में नौ साल पहले भी हॉकी मैदान का शिलान्यास तत्कालीन खेल मंत्री सुखदा पांडेय ने किया था, लेकिन नौ साल से ये मैदान अधूरा पड़ा है. बात सिर्फ हॉकी मैदान की नहीं बल्कि क्रिकेट स्टेडियम की हालत भी खराब है. जिस मोइनुल हक स्टेडियम पर कभी अंतराष्ट्रीय मैचों का आयोजन होता था वो आज रणजी मैच के काबिल ही नहीं बचा है.

बिहार की तरफ हॉकी के कई मैच खेल चुके पूर्व सीनियर राष्ट्रीय खिलाड़ी राणा प्रताप सिंह के मुताबिक खिलाड़ियों की ट्रेनिंग की बात तो दूर यहां ह़ॉकी के ळिए ढंग का मैदान भी नहीं है. जब मैदान ही नहीं होंगे तो मैच का आयोजन कैसे होगा. 

दरअसल, पटना में एक समय था जब मोइनुल हक जैसे मैदान थे, जहां पर विश्व कप क्रिकेट तक के मैच खेले गए. लेकिन समय बीतता गया और बिहार में खेल के साथ ही खेल हो गया. कभी किसी एस्ट्रो टर्फ मैदान से संबंधित फाइल ही गायब हो गई तो कभी 10 साल बीत जाने के बावजूद एक ढंग का मैदान तैयार नहीं हो सका. 

हॉकी एस्ट्रोटर्फ मैदान से संबंधित गायब हुई फाइल को खुद कला,संस्कृति और युवा विभाग ने भी स्वीकार किया है.इसकी पुष्टि सरकार के अपर सचिव दीपक आनंद ने कला, संस्कृति और युवा विभाग के लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को चिट्ठी लिखकर दी है.

पटना में राजेंद्र नगर में फिजिकल कॉलेज के पीछे भी हॉकी खिलाड़ियों के लिए मैदान का शिलान्यास तत्कालीन युवा, कला और संस्कृति मंत्री सुखदा पांडेय ने किया था, लेकिन नौ साल में मैदान तैयार नहीं हुआ. संयोग से आज हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर राष्ट्रीय खेल दिवस भी मनाया जा रहा है लेकिन बिहार में ये सिर्फ औपचारिकता है.

पटना के जिला खेल पदाधिकारी संजय कुमार भी मानते हैं कि, राजधानी में खेल को लेकर ज्यादा कुछ सरकार की तरफ से नहीं किया गया है, लेकिन उनका कहना है कि पटना के साथ ही मुजफ्फरपुर और पूर्णिया में ह़ॉकी के एस्ट्रोटर्फ मैदान प्रस्तावित है. स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया से इसको लेकर बात चल रही है, लेकिन क्या कला, संस्कृति और युवा विभाग वाकई खेल मैदान के लिए गंभीर हैं. 

उसकी लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगता है कि जिस ह़की एस्ट्रोटर्फ का उद्घाटन साल 2011 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों हुआ था उससे संबंधित रिकॉर्ड ही कला, संस्कृति और युवा विभाग के पास नहीं है. 

बिहार में खेल के साथ ही खेल हो गया और यही कारण है कि यहां जिस ह़ॉकी, क्रिकेट या फुटबॉल इन खेलों के खिलाड़ी दूसरे राज्य अपना जौहर दिखाने चले गए. बिहार में बन बनाए स्टेडियम बर्बाद हो गए और जिन स्टेडियम के लिए काम शुरू हुआ वो नौ साल बीत जाने के बावजूद पूरा नहीं हुआ.