पटना में गंगा अब भी दूषित, 6 साल में नहीं मिल सका नमामि गंगा प्रोजेक्ट का राजधानी को लाभ

राष्ट्रीय जनता दल के जमुई से विधायक और पूर्व मंत्री विजय प्रकाश के मुताबिक, नमामि गंगे योजना भ्रष्टाचार की शक्ल लिए हुए है और गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के चक्कर में लाखों की हेराफेरी हुई.

पटना में गंगा अब भी दूषित, 6 साल में नहीं मिल सका नमामि गंगा प्रोजेक्ट का राजधानी को लाभ
पटना में अब भी संप हाउस से निकला पानी बिना ट्रीटमेंट के गंगा में जा रहा है.

पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Vidhansabha Chunav) से ठीक पहले राजधानी में दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उद्घाटन किया. बेऊर एसटीपी 77.85 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ तो वहीं करमलीचक एसटीपी 83 करोड़ से भी ज्यादा की लागत से तैयार हुआ है.

हालांकि इन दोनों एसटीपी (STP) का लाभ गंगा को नहीं मिला. इन दोनों एसटीपी से पुनपुन नदी को जरूर लाभ पहुंचेगा. क्योंकि पुनपुन में अब साफ पानी ही अंदर जाएगा. लेकिन आस्था का प्रतीक माने जाने वाली गंगा नदी का क्या हुआ. हालांकि, राजधानी में गंगा की अविरलता बचाने के लिए भी एसटीपी प्लांट पर काम हो रहा है. लेकिन इसकी रफ्तार धीमी है.

पटना में अब भी संप हाउस से निकला पानी बिना ट्रीटमेंट के गंगा में जा रहा है. राजधानी में बांसघाट से ठीक पहले ओल्ड मंदिरी संप हाउस से गंदा पानी नालों के शक्ल में गिर रहा है. दूसरी ओर राजापुल इलाके में भी गंदा हजारों लीटर गंदा पानी गंगा में गिराया जा रहा है. हालांकि, बीजेपी मानती है कि गंगा (Ganga) केवल चुनावी मुद्दा ही नहीं बल्कि आस्था का भी मुद्दा है.

नमामि गंगे योजना की शुरुआत साल 2014 में हुई. 20 हजार करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का मकसद गंगा को उसका पुराना गौरव वापस दिलाना था. वैसे शहर जो गंगा के किनारे बसे हैं, उन शहरों के नालों का पानी बिना कचरा साफ किए गंगा में न मिले. नमामि गंगा प्रोजेक्ट (Namami Ganga Project) के तहत बिहार में 1259 करोड़ से अधिक की आठ बड़ी मंजूरी दी गई.

राजधानी पटना में पांच एसटीपी नमामि गंगा प्रोजेक्ट के तहत बनने हैं. लेकिन छह साल पूरे होने के बाद भी गंगा के लिए एक भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार नहीं हुआ. राजधानी की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और इसी के साथ ही गंगा में नालों से निकली गंदगी के कारण प्रदूषित और मैली होती जा रही है. संप हाउस से सीधे पानी गंगा में बहाया जाता है.

राष्ट्रीय जनता दल के जमुई से विधायक और पूर्व मंत्री विजय प्रकाश के मुताबिक, नमामि गंगे योजना भ्रष्टाचार की शक्ल लिए हुए है और गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के चक्कर में लाखों की हेराफेरी हुई. गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए आजादी से अबतक करोड़ों रूपए खर्च किए गए हैं. लेकिन सच्चाई ये है कि इन सबके बावजूद गंगा साफ होने की बजाय दूषित होती गई.