कोरोना का ऐसा 'ताड़व', फुटपाथी दुकानदारों से लेकर सबका धंधा चौपट!

Gaya Samachar: आवागमन बंद हो जाने से पर्यटकों पर आधारित फुटपाथी दुकानदारों का व्यवसाय पूरी तरह से ठप हो गया था.

कोरोना का ऐसा 'ताड़व', फुटपाथी दुकानदारों से लेकर सबका धंधा चौपट!
फुटपाथी दुकानदारों से लेकर सबका धंधा चौपट!

Gaya: ज्ञान की नगरी और वर्ल्ड हैरिटेज गया में साल 2020 में कोविड (Covid) के कारण पूरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा था. वहीं, कोविड की दूसरी लहर ने जिंदगी में एक बार फिर ब्रेक लगा दिया है. जिससे स्थानीय दुकानदारों व ई रिक्शा चालकों की परेशानी बढ़ गई है. 

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बता दें कि पिछले साल मार्च के महीने में देश व्यापी लॉकडाउन लगा दिया गया था जिसके बाद ज्ञान की भूमि पर विदेशी पर्यटकों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया था. आवागमन बंद हो जाने से पर्यटकों पर आधारित फुटपाथी दुकानदारों का व्यवसाय पूरी तरह से ठप हो गया था. जिससे पूरे परिवार का भरण पोषण पर भी काफी असर देखने को मिला था. साथ हीं, फिर से शुरू हुए व्यवसाय पर कोविड की दूसरी लहर की मार से फुटपाथी दुकानदारों को एक बार फिर से बड़ा झटका लगा है.

वहीं, विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर (Mahabodhi Temple) के बंद हो जाने से भगवान बुद्ध की आराधना करने वाले भक्तों और बौद्ध भिक्षुओं में एक अलग ही आस्था देखने मिली है. मंदिर में प्रवेश बंद हो जाने के बाद बौद्ध श्रद्धालु और भिक्षु मंदिर परिसर के लाल पत्थर पर भगवान बुद्ध की आराधना कर रहे है. साथ हीं, भगवान बुद्ध से इस महामारी से संसार के सभी मनुष्य की जीवन के लिए प्रार्थना कर रहे है. ताकि इस महामारी से लोगों के जीवन को बचाया जा सके.

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इधर, फुटपाथी दुकानदार धीरज कुमार ने बताया कि व्यवसाय पर बहुत ही गहरा असर पड़ा है. पिछले साल कोरोना के कारण एक साल तक काफी नुकसान हुआ है और पर्यटक नहीं आने से खाने-पीने तक की दिक्कत हो गई है. वहीं, उसने बताया कि कर्ज लेकर किसी तरह घर परिवार को चला रहे हैं. लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के कारण लोग दोहरे कर्ज में चले गए हैं और कर्ज के बोझ से लोग डिप्रेशन में चले गए हैं. इस महामारी के आने से परिस्थिति बहुत ही खराब होती जा रही है.

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वहीं, ई रिक्शा चालक पंकज कुमार शर्मा ने बताया कि पर्यटकों के नहीं आने से काम पर बहुत असर पड़ा रहा है. वे लोगों का बोहनी भी नसीब नहीं हो रही है. वहीं, उन्होंने बताया कि पहले हमलोग लाइन से भी चलते थे तो 500 से 600 रुपए कमा लेते थे और अच्छे से परिवार को चला लेते थे. 

(इनपुट-जय प्रकाश कुमार)