4 लाख के लिए नेपाल के अस्‍पताल में 4 महीने से बंधक है एक परिवार, हॉस्पिटल दे रहा किडनी निकालने की धमकी

पैसे नहीं चुकाने पर बंधक बनाए गए लोगों की किडनी और आंख निकालने की दी धमकी.

4 लाख के लिए नेपाल के अस्‍पताल में 4 महीने से बंधक है एक परिवार, हॉस्पिटल दे रहा किडनी निकालने की धमकी
नेपाल के अस्पताल में कैद संतोष यादव की पत्नी ने लगाई सरकार से गुहार.

कटिहार : डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है, लेकिन इस घटना को जानने के बाद शायद आप इस बारे में सोचने के लिए मजबूर हो जाएं. नेपाल के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में कटिहार का एक व्यक्ति अपनी पत्नी और बेटी के साथ बीते चार महीनों से बंधक बना हुआ है. चार लाख रुपए के लिए अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें बंधक बनाकर रखा है. जिले के फलका प्रखंड के रहने वाले संतोष यादव के परिजनों ने इलाज में खर्च होने वाले पैसों को चुकाने के लिए जमीन और घर तक गिरवी रख दिया. वे आठ लाख रुपये का भुगतान कर चुके हैं. वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने फोन कर फिर परिजनों से चार लाख रुपयों की मांग की है.

'पैसे नहीं देने पर किडनी निकालने की दी धमकी'
परिजनों का आरोप है कि भुगतान नहीं होने पर बंधक बनाए गए तीनों लोगों की किडनी निकालने की धमकी दी गई है. पीड़ित संतोष की पत्नी और भाई नेपाल के विराटनगर अस्पताल से भागकर जी मीडिया को पूरी आपबीति बताई.

फलका प्रखंड के गोविंदपुर पंचायत के रंगाकोल गांव का रहने वाला यह परिवार प्रशासन और सरकार से नेपाल में बंधक बनाए गए अपने परिजनों की रिहाई के लिए गुहार लगा रहा है. नेपाल के गोल्डन हॉस्पिटल के प्रबंधक द्वारा अस्पताल का बकाया फीस की राशि जमा नहीं करने पर इलाजरत संतोष सहित तीन लोगों को महीनों से बंधक बनाकर रखने का आरोप है. 

जमीन गिरवी रखकर परिजनों ने चुकाए आठ लाख
पीड़ित परिवार ने जमीन गिरवी रखकर आठ लाख रुपए चुका दिए हैं. उन्हें उम्मीद थी कि शायद संतोष को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल जाएगी. अब उनकी माली हालत ठीक नहीं है. परिजनों ने हॉस्पिटल की अगली डिमांड को पूरा करने में असमर्थता जताई. इस कारण गोल्डन अस्पताल ने पीड़ित की मां कमला देवी और बेटी सुहानी को एक रुम में बंधक बनाकर रखा है. वहीं, जख्मी संतोष को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है. 

मरीज की पत्नी सरकार से लगा रही है गुहार
बकाया पैसा नहीं चुकाने पर बंधक बने लोगों की किडनी और आंख निकाल लेने की चेतावनी भी दी गई है. अस्पताल के कर्मचारी की मदद से किसी तरह मरीज की पत्नी रेणु अपने देवर के साथ भागकर घर पहुंची. गांव के लोगों और सरकार से मदद की गुहार लगा रही है कि बेटी, सास और बीमार पति को नेपाल के हॉस्पिटल से आजादी मिल सके.

इलाजरत जख्मी संतोष के पिता जोगिंदर यादव ने बताया कि 26 जुलाई को शाम करीब चार बजे अस्पताल के मोबाइल नम्बर +977980431797 और +919661271379 से फोन आया. फोन पर कहा गया कि या तो पैसा जमा करो या फिर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो. 

बताया जाता है कि बंधक बनाए गए मरीज संतोष यादव एक बस पर खलासी का का करता था. चार महीना पहले मनिहारी मोड़ पेट्रोल पंप के समीप अज्ञात लोगों ने उसे मार-मारकर अधमरा कर दिया. स्थानीय अस्पताल में उसका इलाज के लिए भर्ती किया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया. वहां नेपाल के एक निजी हॉस्पिटल में इलाज कराने की सलाह दी गई. जिला पार्षद अंजना ने जिला पदाधिकारी को आवेदन देकर बंधक बने रोगी सहित परिवार को मुक्त करने की मांग की है.