पटना: विलय से नाराज सरकारी बैंक कर्मियों ने किया हड़ताल, लोग हुए बेहाल

हड़ताल की मुख्य वजह सरकारी बैंकों का विलय माना जा रहा है. बैंकों के विलय से सरकारी बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी खिलाफ हैं.

पटना: विलय से नाराज सरकारी बैंक कर्मियों ने किया हड़ताल, लोग हुए बेहाल
बैंकों में हड़ताल के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

पटना: आज देशभर के सरकारी बैंकों में हड़ताल है. इस कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. 

हालांकि, इस हड़ताल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और निजी बैंक शामिल नहीं है.

सरकारी बैंकों में हड़ताल का असर कामकाज पर भी देखने को मिल रहा है. इसका नतीजा ये है कि एटीएम के बाहर लंबी लाइनें लगी रही हैं.

हड़ताल की मुख्य वजह सरकारी बैंकों का विलय माना जा रहा है. बता दें कि ये हड़ताल ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन की तरफ से घोषित की गई है.

दरअसल पिछले एक साल में कई सरकारी बैंकों का आपस में विलय कर दिया गया है. इससे सरकारी बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी खिलाफ हैं. 

हालांकि, मर्जर की इस प्रक्रिया से बैंक मजबूत ही हुए हैं, लेकिन सरकारी बैंकों के यूनियन लीडर इस बात को नहीं मानते हैं.

कुछ महीने पहले बैंक ऑफ बड़ौदा में देना बैंक और विजया बैंक का विलय हुआ था. सरकार की योजना अगले कुछ महीनों में कुछ और बैंकों के विलय करने की है.

बैंकों के विलय से बैंक कर्मचारी संगठनों में नाराजगी है. कर्मचारी यूनियन ने सरकार से सभी बैंकों में उचित संख्या में भर्ती, बेड लोन यानि खराब ऋण की वसूली और बैंकों में सुधार को मुद्दा बना लिया है.

पटना में भी सरकारी बैंकों से जुड़े कर्मचारी संघों ने इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शाखाओं के सामने प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन और हड़ताल में सरकारी कर्मचारी भी शामिल रहे.

वहीं, बिहार स्टेट इलाहाबाद बैंक स्टाफ एसोसिशन के महासचिव उत्पल कांत ने कहा है कि कुछ साल पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सहायक बैंकों का विलय कर दिया गया.

उन्होंने कहा कि आज उन बैंकों की क्या हालत है. कुछ महीने पहले बैंक ऑफ बड़ौदा में दो सरकारी बैंकों का विलय हुआ है. इन विलयों का कोई सकारात्मक असर नहीं हुआ है.

ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉय एसोसिशन के संयुक्त सचिव अनिरूद्ध कुमार ने कहा कि बैंकों में बहाली हुई नहीं है. आज बैंकों की शाखाएं बंद की जा रही हैं. हमारे सामने हड़ताल के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है.

कुमार ने कहा कि सरकार से कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन वो नाकाम रही है.

गौरतलब है कि सरकारी बैंकों का विलय केन्द्र की योजना में शामिल है. लेकिन जिस तरह से बैंक कर्मचारी यूनियन लगातार हड़ताल पर जाते हैं, उससे बैंकों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है.