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विफल रहा नेत्रदान करने की अंतिम इच्छा पूरी करने में सरकारी तंत्र

धनबाद जिले में लोगों की अंतिम इच्छा पूरी करने में भी सरकारी तंत्र पूरी तरह से विफल है. नेत्रदान करने की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए परिजनों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी.

विफल रहा नेत्रदान करने की अंतिम इच्छा पूरी करने में सरकारी तंत्र
धनबाद में नेत्रदान की अंतिम इच्छा को पूरा करने में असफल रहा पीएमसीएच. (प्रतीकात्मक फोटो)

धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले में लोगों की अंतिम इच्छा पूरी करने में भी सरकारी तंत्र पूरी तरह से विफल है. नेत्रदान करने को लेकर लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है. देश में अभी भी कम ही संख्या में लोग हैं जो नेत्रदान करने की इच्छा जताते हैं. वहीं, जो इस तरह की इच्छा रखते हैं उनके लिए कोई पहल नहीं कि जाती है जिससे की उसकी अंतिम इच्छा पूरी हो सके. 

ऐसा ही मामला धनबाद में आया है जहां नेत्रदान करने को लेकर परिजनों को काफी मशक्कत करनी पड़ी. पीएमसीएच में पिछले माह कॉर्निया को सुरक्षित रखने वाला केमिकल खत्म हो चुका है. अस्पताल में भर्ती एक मरीज की मौत के बाद उसकी नेत्रदान करने की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए परिजनों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी. नेत्रदान के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा हाथ खड़े करने पर परिजन खुद आसनसोल से केमिकल लाए और नेत्रदान कराया.

आसनसोल रानीगंज के रहने वाले सुरेश अग्रवाल को लीवर की शिकायत होने पर उन्हें पीएमसीएच में भर्ती कराया गया. बुधवार रात करीब दस बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.सुरेश अग्रवाल की अंतिम इच्छा थी कि उनके नेत्रदान किये जाए. उसकी नेत्रदान की अंतिम इच्छा पूरी करने लिए उनके परिजन ने पीएमसीएच अस्पताल के अधीक्षक एचके सिंह से बात की, तो उन्होंने यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिये कि आई बैंक में कॉर्निया को सुरक्षित रखने वाला केमिकल नहीं है. परिजन अंकित के मुताबिक उसने मामले की सूचना फोन पर स्वास्थ्य सचिव नितिन कुलकर्णी को भी दी. हालांकि उन्होंने भी यह कहते हुए फोन डिस्कनेक्ट कर दिया कि मैं रांची में हूं फिलहाल कुछ नहीं कर सकता.

वही समाजसेवी अंकित द्वारा फिर बीजीएच को फोन कर नेत्रदान के संबंध में बात की, लेकिन यह प्रयास भी असफल रहा. आखिरकार अंकित के द्वारा रोटरी क्लब के राजेश मतालिया से सम्पर्क किया गया. आसनसोल के पुनरदृष्टि बैंक से मतालिया ने फोन पर सम्पर्क साधा, जिसके बाद वो केमिकल देने के लिए राजी हो गया. दृष्टि बैंक द्वारा पीएमसीएच अधीक्षक से आवेदन देने की मांग की गई. अंकित द्वारा व्हाट्सएप पर अधीक्षक के आवेदन की कॉपी दृष्टि बैंक को भेजी गई. आसनसोल के ही रहने वाले मृतक के परिजन दृष्टि बैंक से केमिकल कलेक्ट कर पीएमसीएच अस्पताल पहुंचे. पीएमसीएच केमिकल पहुंचने में रात के करीब डेढ़ बजे गए.

परिजन द्वारा केमिकल की वयवस्था करने की सुचना के बाद अस्पताल प्रवन्धक पहले से ही आई बैंक की टीम तैयार थी. केमिकल आने के बाद आई बैंक के सहायक संजय कुमार और मेडिकल स्टॉफ ने मृतक की कॉर्निया को निकालकर सुरक्षित रख लिया. आई बैंक सहायक संजय कुमार ने बताया कि कॉर्निया को सुरक्षित रख लिया गया है. केमिकल का ड्यूरेशन चार दिनों का है. चार दिनों के अंदर इस कॉर्निया को जरूरतमंद को लगा दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि एमके मीडिया नाम का यह केमिकल 2 तरह का होता है. एक 4 दिन के ड्यूरेशन होता है, जिसकी कीमत करीब 400-500 रु है. वहीं, दूसरे का ड्यूरेशन 14 दिन होता है, जिसकी कीमत करीब एक हजार रुपये है.