झारखंड: 'अयोध्या तो हो गई राम की, हनुमान के जन्म स्थान का कब होगा जीर्णोद्धार?'

जंगलों की बीच पहाड़ और पहाड़ के एक इलाके में छोटी सी गुफा और गूफा के अंदर मां अंजनी की गोद में बैठे हनुमान. यह नजारा उस गूफा का है जहां की ऐसी मान्यता है कि मां अंजनी ने भगवान हुनमान को जन्म दिया था.

झारखंड: 'अयोध्या तो हो गई राम की, हनुमान के जन्म स्थान का कब होगा जीर्णोद्धार?'
जीर्णोधार के इंतजार में हनुमान का जन्म स्थान.

गुमला: अयोध्या तो राम की लेकिन हनुमान के आंजन धाम को बुनियादी सुविधाएं कब? यह सवाल गुमला जिले के बिशुनपुर विधानसभा (Bishunpur Assembly Constituency) के लोग चुनावी मैदान में इलाके का प्रतिनिधित्व करने की चाहत रखने वाले नेताओं से पूछ रहे हैं. दरअसल, चुनावी सफर के दौरान हम आपको आंजन धाम की बदहाली की वैसी तस्वीर दिखाएंगे, जिसे देखकर कई सवाल उठने लाज़मी हैं.

गुमला जिले के विशुनपुर विधानसभा अंतर्गत आने वाले आंजन धाम (Hanuman Birth Place) की प्राचीन काल से धार्मिक मान्यताएं हैं. ऐसी मान्यता है कि तकरीबन 12 सौ से 15 सौ फीट ऊपर स्थित गुफा में मां अंजनी ने पवन पुत्र हनुमान को जन्म दिया था. आज आलम यह है कि यह पवित्र स्थल अपने आस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है.

खूबसूरत वादियों के बीच पहाड़ में स्थित गुफा तो है, लेकिन गुफ़ा तक पहुंचने के लिए कच्ची पथरीली सड़क अपने निर्माण का सपना देख रही है. मंदिर में न तो पानी की सुविधा है न ही बिजली की. रास्ता भी है तो कष्टदायक. मुख्य सड़क से मंदिर के नीचे तक सड़क की लंबाई तकरीबन 2 किलोमीटर है, लेकिन गाड़ियां क्या, यहां पैदल चलने वाला इंसान भी हिचकोले खाने लगे.

जंगलों की बीच पहाड़ और पहाड़ के एक इलाके में छोटी सी गुफा और गूफा के अंदर मां अंजनी की गोद में बैठे हनुमान. यह नजारा उस गूफा का है जहां की ऐसी मान्यता है कि मां अंजनी ने भगवान हुनमान को जन्म दिया था.

प्राचीन मंदिर के पुजारी की मानें तो आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी यह महज चुनावी मुद्दा बनकर रह गया. वहीं, लोग कहते हैं कि राम जन्मभूमि के जिस भूमि पर विवाद था वहां तो इतने सालों के बाद राम जी को बनवास से छुटकारा मिल गया, लेकिन यहां तो कोई विवाद भी नहीं है. राम जी के परम भक्त माने जाने वाले हनुमान जी का जन्मस्थल उपेक्षा का शिकार है.

बीते दिनों जब राज्यपाल यहां पहुंची तो सड़क सहित बुनियादी सुविधाओं को लेकर निर्माण कार्य शुरू हुए, लेकिन गुजरे वक्त के साथ निर्माणकार्य भी गुज़र गया. लेकिन इतना तो साफ है कि आज हनुमान जन्मभूमि सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं, क्योंकि हनुमान भक्तों ने साफ कर दिया है की जो इस स्थल को संजोएगा वोट उसी को देंगे.

(सहयोगी रणधीर के साथ)