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झारखंड: हैदरनगर में अंधविश्वास कुछ ऐसा कि 100 सालों से लगता है 'भूतों का मेला'', प्रशासन बेखबर

झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर में पिछले 100 वर्षो से भूतों का मेला लगता है. हैदरनगर पलामू के डाल्टेनगंज मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस धाम को शक्ति पीठ के नाम से भी जाना जाता है.

झारखंड: हैदरनगर में अंधविश्वास कुछ ऐसा कि 100 सालों से लगता है 'भूतों का मेला'', प्रशासन बेखबर
झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर में पिछले 100 वर्षो से भूतों का मेला लगता है.

पलामू: झारखंड के पलामू के हैदरनगर में अंधविश्वास की अनोखी झलक देखने को मिल रही है. लोगों का मानना है कि भूतों की हर तरह की हरकत सच में देखने को मिलता है फिर भी पलामू प्रशासन इस बात से बेखबर है और इस तरह की अंधविश्वाश जैसी धारणाओं पर रोक नही लगा पा रही है. इसे आप देखकर आश्चर्य में पड़ जायेंगे यहां भूत प्रेत नाचते- झूमते हैं.

झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर में पिछले 100 वर्षो से भूतों का मेला लगता है. हैदरनगर पलामू के डाल्टेनगंज मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस धाम को शक्ति पीठ के नाम से भी जाना जाता है. हैदरनगर को भूतों का गांव भी कहा जाता है. जिस किसी बच्चे, स्त्री और पुरुष पर भूतों का साया रहता है तो वो भूत से छुटकारा पाने के लिए इस जगह पर आते हैं और उन्हें यहां आने के बाद भूतों से पूरी रूप से छुटकारा मिल जाता है. इस स्थान पर देश के हर कोने से लोग आते है और अपने कष्टों से छुटकारा पाते हैं.

नवरात्री के समय यहां पर भीड़ इतनी हो जाती है कि लोग साड़ियो एवं चादरों से तम्बू बनाकर रहते है. इस जगहों पर रहने वाले लोगों का कहना है कि जब रात होती है तब इसके आस पास के इलाको में भूतों के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ती है. इस स्थान पर लोग डर से रहना पसंद नहीं करते हैं. इस जगह पर वही लोग निवास करते हैं जो शुरू से ही इस जगह पर रहते हैं. 

यहां पर पहुंचे पुजारियों और ओझाओं का कहना है की पिछले कई वर्षो से हमलोग यहां आ रहे है और कई लोगों को भूतों के प्रकोप से छुटकारा भी दिला चुके हैं. जिसपर भी भूत प्रेत का छाया रहता है उसके शरीर से उस आत्मा को निकाल कर हम लोग एक लोहे की बने चिलम में बंद कर एक पेड़ में गाड़ देते हैं. ऐसा करने पर लोगों को भूतों से छुटकारा मिलता है और आत्मा पेड़ में कैद होकर रह जाती है. जिस पेड़ में इन्हें कैद किया जाता है वह पेड़ शीतला मां के मंदिर के परिसर में ही स्थित है. हैरान करने वाली बात है कि पिछले कई सालों से लगातार यहां पर इस तरह का मेला लगता है लेकिन प्रशासन ने कभी इसे लेकर कोई कार्रवाई करना उचित नहीं समझा. 
Palak Sharma, News Desk