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पटना: जलजमाव के बाद महामारी का खतरा, 85000 घरों तक ब्लीचिंग पाउडर पहुंचाने में जुटी सरकार

पटना के ज्यादातर इलाकों से पानी निकल चुका है. अब महामारी की संभावना मुंह बाए खड़ी है. पीने का साफ पानी अभी भी घरों तक नहीं पहुंच पा रहा है.

पटना: जलजमाव के बाद महामारी का खतरा, 85000 घरों तक ब्लीचिंग पाउडर पहुंचाने में जुटी सरकार
ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन का पैकेट तैयार करती आशा कार्यकर्ता.

पटना: बिहार की राजधानी पटना (Patna) में महामारी की संभावना को स्वास्थ्य विभाग खारिज कर चुका है. लेकिन उसके बावजूद इससे बचाव के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है. महामारी की रोकथाम के लिए पटना के 85 हजार घरों तक स्वास्थ्य विभाग (Health Department) ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन के टैबलेट पहुंचाने में जुटा है. इसके लिए आशाकर्मी और जिला स्वास्थ्य समिति के सदस्य बड़े पैमाने पर जुटे हैं.

पटना के ज्यादातर इलाकों से पानी निकल चुका है. अब महामारी की संभावना मुंह बाए खड़ी है. पीने का साफ पानी अभी भी घरों तक नहीं पहुंच पा रहा है. जिन्होंने बोरिंग कराया था, उनका भी फेल हो चुका है. ऐसे में साफ पानी लोगों को पीने के लिए मिल सके यह सबसे जरुरी है. इसके अलावा गंदगी और डेंगू के प्रकोप से बचना भी लोगों की लिए बड़ी चुनौती है.

स्वास्थ्य विभाग की ओर से बड़े पैमाने पर तैयारी चल रही है. पटना के फुलवारीशरीफ ब्लॉक ऑफिस में बड़े पैमाने पर ब्लीचिंग पाउडर की पैकिंग का काम इन दिनों युद्ध स्तर पर चल रहा है. पटना जिले के 23 ब्लॉकों की आशाकर्मियों से ब्लीचिंग पाउडर की पैकिंग में उनकी सेवा ली जा रही है. ब्लीचिंग पाउडर की गंध इतनी तेज है कि इन्हें खुले में पैक करना आसान नहीं होता. इसलिए आशाकर्मियों को बजाप्ता इसके लिए मास्क के अलावा चश्मा और हैंड ग्लब्स भी उपलब्ध काराए गये हैं. आशाकर्मी आरती गुप्ता कहती हैं कि इस काम में उन्हें तकलीफ तो होती है लेकिन महामारी नहीं फैले इसके लिए ये जरूरी है. बाढ़ पीडितों की मदद करना पुण्य का काम है. 

फुलवारीशरीफ ब्लॉक आफिस में हर दिन 10 हजार पैकेट ब्लीचिंग पाउडर के तैयार किये जा रहे हैं. डिमांड को देखते हुए शुक्रवार से इसकी संख्या बढ़ाकर 15 से 20 हजार हजार प्रतिदिन कर दी गई है. ब्लीचिंग पाउडर पैकिंग का काम देख रहे सुपरवाइजर गिरिश कुमार ने बताया कि हमें 85 हजार घरों तक ब्लीचिंग पाउडर के पैकेट पहुंचाने हैं, जिसके लिए युद्ध स्तर पर काम हो रहा है. ब्लीचिंग पाउडर पैकिंग के दौरान आशाकर्मियों की सेहत का भी विशेष ख्याल रखा जा रहा है.  

मिशन हेल्थ को लेकर स्वास्थ्य विभाग की दो टीमें काम कर रही हैं. एक टीम ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन के पैकेट तैयार कर रही है तो दूसरी टीम इन्हें लोगों तक पहुंचा रही है. पटना के राजेन्द्र नगर और उसके आसपास के इलाकों में ही 30 हजार घरों तक ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन की गोलियां पहुंचानी है. यूनिसेफ के ब्लॉक कॉर्डिनेटर साहिल बताते हैं कि हम न केवल पाउडर और गोलियां बांट रहे हैं, बल्कि उन्हें कैसे इस्तेमाल करना है ये भी लोगों को बता रहे हैं. ब्लीचिंग पाउडर को घर के आसपास गंदगी वाले जगहों पर डालना है. वहीं, क्लोरीन की 25 गोली भी प्रति घर दी जा रही है. प्रति गोली को 20 लीटर पानी में पीसकर डाल दिया जाता है. दो घंटे के बाद पानी पीने लायक हो जाता है. 

राजेन्द्र नगर रोड नंबर दो के निवासी संजय कुमार कहते हैं कि अभी भी पीने लायक पानी उनके नल से नहीं आ रहा है. पानी में बदबू है. जार का पानी वो बाहर से मंगवाते हैं, जिससे काम चल रहा है. नगर निगम और सरकार की तरफ से कोई सुविधा नहीं दी गई है. संयज कुमार ने कहा कि निगम को टैक्स देने के बाद अगर ये हालात हैं तो हम राजेन्द्र नगर के लोग इसबार विचार कर रहे हैं कि निगम को टैक्स देना ही बंद कर दें.