VIDEO : हिंदी दिवस पर शिक्षकों का रियलिटी टेस्ट, विद्यार्थी तक लिखना नहीं आता

वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षकों को छोटे से छोटे सवालों का जवाब पता नहीं है. कुछ ने तो इतना तक कहा कि अभी शिक्षकों को ही बुनियादी शिक्षा की जरूरत है.

VIDEO : हिंदी दिवस पर शिक्षकों का रियलिटी टेस्ट, विद्यार्थी तक लिखना नहीं आता
हिंदी दिवस पर शिक्षकों का रियलिटी टेस्ट.

कटिहार : आज (14, सितंबर) हिंदी दिवस है. जी-मीडिया ने बिहार के कटिहार के सरकारी स्कूल में शिक्षकों का जब रियलिटी टेस्ट लिया तो चौकाने वाले परिणाम सामने आए. कई शिक्षकों को वर्णमाला तक की जानकारी नहीं है तो कुछ को तो विद्यार्थी तक लिखना नहीं आता. 'समान काम के बदले समान वेतन' के मुद्दे पर धरना प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों की स्थिति देखकर आप राज्य की शिक्षा व्यवस्था की कल्पना कर सकते हैं. इन्हें देखकर तो यही लगता है कि भगवान भरोसे ही है बिहार की शिक्षा व्यवस्था.

जी-मीडिया की टीम जब कटिहार के इस स्कूल में पहुंची तो शिक्षक हों या शिक्षिका सभी कैमरे से बचते नजर आए. वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षकों को छोटे से छोटे सवालों का जवाब पता नहीं है. कुछ ने तो इतना तक कहा कि अभी शिक्षकों को ही बुनियादी शिक्षा की जरूरत है.

सरकार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए मुहिम चला रखी है. गरीब परिवार के बच्चे स्कूल आएं, इसके लिए मध्यान्ह भोजन, छात्रवृति, साइकिल, पोशाक सहित कई योजनाएं चलाए जा रहे हैं. शिक्षकों की कमी को देखते हुए सरकार बड़े पैमाने पर शिक्षकों की नियुक्ति भी की है, लेकिन अफसोस आज सरकारी स्कूल के ऐसे शिक्षकों की वजह से बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हो रहे हैं. प्राइवेट स्कूल में मोटी फीस देने में असमर्थ गरीब माता-पिता सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के भरोसे बच्चों को पढ़ने के लिए भेजते हैं.

जी-मीडिया की रियलिटी टेस्ट में ऐसे भी शिक्षक मिले, जिन्हें हिंदी के एक अक्षर का ज्ञान नहीं है. उन्हें यह भी नहीं पता है कि हिंदी दिवस क्यों और कब मनाया जाता है. देश के राष्ट्रपति, राज्य के राज्यपाल सहित अन्य महापुरुषों के बारे में भी नहीं पता है. शिक्षक अब्दुल अली की मानें तो वर्णमाला की संख्या 48 है. कक्षा से भाग रही प्रधानाचार्य मंजू कुमारी को भी वर्णमाला की जानकारी नहीं है. प्रधानाध्यक की मानें तो समान काम के लिए समान वेतन मांगने वाले इन शिक्षकों को अभी बुनियादी पढ़ाई की आवश्यक्ता है.