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बिहार: पंडारक स्थित अति प्राचीन सूर्य मंदिर में छठ के दिन लगती है श्रद्धालुओं की भीड़

बिहार की राजधानी पटना से 72 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में बाढ़ अनुमंडल के पंडारक प्रखंड में सूर्य का मंदिर स्थापित है. यह सूर्य मंदिर अति प्रचानी है. 

बिहार: पंडारक स्थित अति प्राचीन सूर्य मंदिर में छठ के दिन लगती है श्रद्धालुओं की भीड़
पंडारक सूर्य मंदिर में छठ के दिन लगती है श्रद्धालुओं की भीड़.

बाढ़: कार्तिक महीना में छठ महापर्व (Chhath Puja) की महिमा पूरे देश में स्वच्छता और श्रद्धा का अनुपम तालमेल के साथ मनाया जाता है. इसका विशेष महत्व बिहार में देखने को मिलता है. यदि गंगा नदी के किनारे छठ पूजा का आयोजन हो तो इसका एक विशेष ही महत्व है. उत्तरवाहिनी गंगा तट पर विश्व का अनुपम धरोहर पंडारक का सूर्य मंदिर छठ पर्व में आस्था और श्रद्धा का केंद्र बन जाता है.

बिहार की राजधानी पटना से 72 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में बाढ़ अनुमंडल के पंडारक प्रखंड में सूर्य का मंदिर स्थापित है. यह सूर्य मंदिर अति प्रचानी है. यहां कार्तिक महीने में दूर-दराज के लोग मंदिर में पूजा अर्चना और दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं.

जानकारों का मानना है कि इस सूर्य मंदिर का निर्माण 5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण के पुत्र शाम के द्वारा किया गया था. मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र को श्राप दिया था, जिसके बाद 12 वर्षों तक उनके पुत्र ने पूरे विश्व में घूम-घूम कर भगवान सूर्य की आराधना करते फिर रहे थे. इस दौरान उन्होंने 12 सूर्य मंदिर का निर्माण कराया था, उसमें से तीन सूर्य मंदिर पूरे विश्व में प्रसिद्ध हुआ. मान्यता है कि पहला सूर्य मंदिर मोनार्क में बनाया गया था. दूसरा भारत के दक्षिण में कोणार्क मंदिर और तीसरा पंडारक में. धारणा है कि इस मंदिर में आकर जो लगातार सात रविवार को पूजा करता है उसके तमाम व्याधि नष्ट हो जाते हैं.

ग्रामीणों का मानना है कि अब तक कई लोग अपना चर्म रोग लेकर यहां पहुंचे और लगातार श्रद्धा भाव से उन्होंने मंदिर की सेवा और पूजा-अर्चना की. इसके उपरांत उन्हें असाध्य रोग से मुक्ति मिल गई. यहां दूर-दराज से लोग छठ पूजा मनाने के लिए भी आते हैं.