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पटना: बदहाल स्थिति में अस्पताल, सप्ताह में सिर्फ एक दिन आते हैं डॉक्टर

अस्पताल खंडहर में तब्दील हो चुका है. गांव के लोगों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना ना पड़े इसलिए इसे खोला गया था लेकिन आज इस अस्पताल को खुद इलाज की जरूरत है.   

पटना: बदहाल स्थिति में अस्पताल, सप्ताह में सिर्फ एक दिन आते हैं डॉक्टर
डॉक्टर सिर्फ बुधवार को यहां आते हैं.

पटना: बिहार की राजधानी पटना के दुल्हिन बाजार प्रखंड का अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है. अस्पताल खंडहर में तब्दील हो चुका है. गांव के लोगों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना ना पड़े इसलिए इसे खोला गया था लेकिन आज इस अस्पताल को खुद इलाज की जरूरत है. 

यहां बेड है, अस्पताल है लेकिन लेकिन ना जरूरी दवा, ना डॉक्टर और ना ही नर्स है. का और ना ही बाकी स्टाफ का. कहने के लिए ये अस्पताल सातों दिन खुला रहता है लेकिन सिर्फ कहने के लिए. यहां डॉक्टरों की मौज है. डॉक्टर सिर्फ बुधवार को यहां आते हैं. लापरवाही का आलम ये है कि डॉक्टर उस दिन भी टाइम पर नहीं आते. 

कहने के लिए अस्पताल रोजाना सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक खुला रहता है लेकिन डॉक्टर साहब बुधवार को आते भी हैं तो सुबह 11 बजे के बाद. बाकी दिन डॉक्टर नदारद रहते हैं. यहां मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है. यहां मरीजों को दवाई कोई स्टाफ नहीं बल्कि चपरासी देता है. इसका अंजाम कितना घातक हो सकता है ये जानते हुए भी डॉक्टर इसे बढ़ावा दे रहे हैं. 

इलाज की आस में यहां मरीज आते हैं लेकिन अक्सर उन्हें मायूस होकर जाना पड़ता है. डॉक्टर के नदारद रहने से यहां के मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है. लोगों के मुताबिक यहां टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है. लोगों और समाजसेवी संस्थाओं ने प्रशासन से इस बार कई बारे में कई बार शिकायत की लेकिन कोई समाधान नहीं निकला. जब पटना के अस्पताल का ये हाल है तो बिहार के बाकी जिलों के सरकारी अस्पतालों की बदहाली का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है.
Abhijeet, News Desk