झारखंड: 10 साल में भी नहीं बना नक्सल प्रभावित सारंडा में अस्पताल, लोगों को हो रही परेशानी

आदिवासी बहुल सारंडा के छोटानागरा में 25 से 30 किलोमीटर दूर जंगल क्षेत्र के दायरे में बसने वाले ग्रामीणों के लिए फिलहाल एकमात्र अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है. यहां न तो डॉक्टर समय पर उपलब्ध रहते हैं और न ही चिकित्साकर्मी.

झारखंड: 10 साल में भी नहीं बना नक्सल प्रभावित सारंडा में अस्पताल, लोगों को हो रही परेशानी
निर्माणाधीन अस्पताल.

चाइबासा: झारखंड के नक्सल प्रभावित सारंडा (Saranda) में ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर धोखा मिल रहा है. ताजा उदाहरण छोटानागरा में बीते दस साल से बन रहे 36 बेड के अस्पताल (Hospital) का है, जो आज भी अधूरा है. अस्पताल के नहीं बनने से सारंडा के लोग स्वास्थ्य सुविधा से महरूम हैं. जब यह अस्पताल बन रहा था तब बताया गया था कि 36 बेड के साथ मरीजों को चिकित्सा की हर तरह की सुविधा मिलेगी. ग्रामीणों को लगा था कि उनकी समस्या अब दूर होने वाली है. लेकिन काम अचानक बंद हो गया.

आदिवासी बहुल सारंडा के छोटानागरा में 25 से 30 किलोमीटर दूर जंगल क्षेत्र के दायरे में बसने वाले ग्रामीणों के लिए फिलहाल एकमात्र अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है. यहां न तो डॉक्टर समय पर उपलब्ध रहते हैं और न ही चिकित्साकर्मी. सारंडा जैसे घने जंगल क्षेत्र होने के बावजूद आपात परिस्थिति में जरूरी जीवन रक्षक दवाएं भी इस अस्पताल में नहीं हैं.

अस्पताल में न तो ममता वाहन की सुविधा है और न ही एम्बुलेंस की व्यवस्था. दूर होने के कारण कॉल करने पर भी 108 एम्बुलेंस भी यहां नहीं आती. आदिवासी ग्रामीणों को लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है.

छोटानागरा के बुद्धिजीवियों, जनप्रतिनिधियों और ग्राम प्रधान ने बताया कि कुछ समय पहले मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने दौरे के क्रम में छोटानागरा आये थे. ग्रामीणों की मांग पर उन्होंने अधूरे पड़े अस्पताल का मुआयना किया था. सीएम ने भरोसा दिया था कि जल्द ही अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा किया जायेगा और लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी.

सीएम के आश्वासन के बीद भी अस्पताल का निर्माण कार्य एक इंच भी आगे नहीं बढ़ा. थक हार कर ग्रामीणों ने अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधा की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा है. फिलहाल ग्रामीणों के खत का न तो अब तक कोई जवाब आया है और न ही अस्पताल निर्माण को लेकर कोई कार्यप्रगति हुई है. ग्रामीणों की आस पीएम मोदी से आज भी बनी हुई है.