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पटना: 12 साल पहले सुनाई थी फ्रांस में गाथा, अब इस IPS ने फ्रेंच में लिखा छठ पर लेख

आशीष 2012 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में किशनगंज एसपी के रूप में अपनी सेवा दे रहें हैं.

पटना: 12 साल पहले सुनाई थी फ्रांस में गाथा, अब इस IPS  ने फ्रेंच में लिखा छठ पर लेख
IPS अधिकारी कुमार आशीष ने फ्रेंच भाषा में लिखा छठ के महत्व पर लेख.

पटना: महापर्व छठ (Chhath) की महिमा ही निराली है. ये त्यौहार सदियों से बिहारवासियों के मन में अपनी मिट्टी और संस्कृति के प्रति लगाव और महान आस्था का संगम है. 

यह पर्व उन तमाम बिहारवासियों के लिए खास हो जाता है जो इस वक्त बिहार की पावन धरा पर कार्यरत ना होकर देश-विदेश के किसी और छोर पर होतें है. 

ऐसी ही कुछ निराली बात बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी कुमार आशीष के साथ सन 2006-2007 में यहां से 9000 किलोमीटर दूर फ्रांस में हुई थी.

आशीष 2012 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में किशनगंज एसपी के रूप में अपनी सेवा दे रहें हैं. वह अपने सामुदायिक पुलिसिंग के विभिन्न सफल प्रयोगों के लिए बिहार सहित पूरे देश में जाने जाते हैं. 

उन्होंने जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) से फ्रेंच भाषा में स्नातक, स्नातोकोत्तर तथा पीएचडी भी किया है. पुलिसिंग के साथ पठन-पाठन और लेखन में भी उनकी व्यापक रूचि रही है. अब तक उनके कई लेख विभिन्न जगहों से प्रकाशित हो चुके हैं. 

आशीष बताते हैं की आज से 12 साल पूर्व जब वो फ्रांस में स्टडी टूर पर गए थे, तब वहां एक संगोष्ठी में कुछ फ्रेंच लोगों ने उनसे बिहार के बारे में कुछ रोचक और अनूठा बताने को कहा था. तब उन्होंने बिहार के महापर्व छठ के बारे में विस्तार से वहां के लोगों को समझाया. 

आईपीएस अधिकारी द्वारा छठ के बारे में बताए जाने के बाद फ्रेंच लोग काफी प्रभावित हुए. फ्रांसीसी लोगों ने कहा की इस विषय पर फ्रांस के साथ फ्रेंच बोलने-समझने वाले अन्य 54 देशों तक भी इस पर्व की महत्ता और पावन संदेश पहुंचाना चाहिए. 

उनकी प्रेरणा से कुमार आशीष ने वापस स्वदेश लौटकर इस पर्व के बारे में और गहन अध्ययन एवं बारीकी से शोध कर छठ पर्व को पूर्णत: परिभाषित करने वाला एक लेख 'Chhath Pouja: l'adoration du Dieu Soleil' लिखा. 

यह लेख भारत सरकार के अंग भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् दिल्ली के द्वारा फ्रेंच भाषा में 'rencontre avec l'Inde' नामक किताब में सन 2013 में प्रकाशित हुई. 

इस लेख में आशीष ने छठ पर्व के सभी पहलुओं का बारीकी से विश्लेषण कर फ्रांसीसी भाषा के लोगों के लिए इस महापर्व की जटिलताओं को समझने का एक नया आयाम दिया है. 

शुरुआत में वे बताते है की छठ मूलत: सूर्य भगवान् की उपासना का पर्व है. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में धार्मिक, सामाजिक, शारीरिक, मानसिक एवं आचारिक-व्यावहरिक कठोर शुद्धता रखी जाती है. 

'छठ' शब्द सिर्फ दिपावाली के छठे दिन का ही द्योतक नहीं है, बल्कि ये इंगित करता है की भगवान् सूर्य की प्रखर किरणों की सकारात्मक ऊर्जा को हठ योग के छः अभ्यासों के माध्यम से एक आम आदमी कैसे आत्मसात कर सभी प्रकार के रोगों से मुक्त हो सकता है? 

इस पर्व के हर छोटे से छोटे विधान की योगिक और वैज्ञानिक महत्ता है, मसलन, साल में दो बार क्यों मनाया जाता है यह पर्व? सूर्य की उपासना के वक्त जल में खड़े रहने का आधार है? डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे का विचार है? सूप और दौरा का पूजा में क्या महत्व है? 

यह पूजा ऋग्वेद काल से शुरू हुई, महाभारत में धौम्य ऋषि के कहने पर द्रौपदी ने पांचों पांडवों के साथ छठ पर्व कर सूर्य की कृपा से अपना खोया राज्य वापस प्राप्त किया था.

बिहार में इसका प्रचलन सूर्यपुत्र अंगराज कर्ण से शुरू होना माना जाता है. बिहार के तीनों बड़े प्रभागों यथा, मगध, भोजपुर और मिथिला में बड़े धूमधाम से यह पर्व मनाया जाता है. 

मिथिला के क्षेत्र में 'कोसी भरना' भी किया जाता है जिसमे मानव-शरीर के पंचतत्व के प्रतीक रूप में पांच गन्ने एक साथ लगाये जाते हैं और उन्हें ऊष्मा प्रदान करने के लिए चारों तरफ से मिट्टी के दीये लगाये जाते हैं. जिस घर में नई शादी या नए बच्चे का आगमन होता है, वो लोग बड़ी निष्ठा से ये रीति निभाते हैं.