अयोध्या फैसले के बाद JDU नेता का छलका दर्द, 1200 मस्जिदों पर जताई खतरे की आशंका

 गुलाम गौस ने कहा है कि अयोध्या के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन आशंका है कि धर्म की तवा पर रोटी सेंकने वाले लोग अब काशी मथुरा समेत देश के 1200 मस्जिदों पर अपना दावा ठोक देंगे.

अयोध्या फैसले के बाद JDU नेता का छलका दर्द, 1200 मस्जिदों पर जताई खतरे की आशंका
जेडीयू नेता गुलाम गौस ने जताई चिंता.

पटना: अयोध्या मामले (Ayodhya Verdict) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसल आ चुका है. फैसले के बाद सभी पक्षों ने इसकी सराहना की है. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने फैसले का सम्मान तो किया है, लेकिन फैसला मुस्लिम पक्ष में नहीं आ सका इसका उन्हें मलाल जरूर है. ऐसे लोग अब अलग तरह की आशंका से परेशान हैं. जनता दल यूनाइटेड (JDU) नेता गुलाम गौस ने भी अयोध्या फैसले पर सहमति जताई है. लेकिन उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि देश के अयोध्या फैसले के बाद दूसरे पक्ष के लोग देश के 1200 मस्जिदों पर भी अपनी दावेदारी ठोक सकते हैं. ऐसे में उनका कहना है कि केन्द्र सरकार यह सुनिश्चित करे कि छह दिसंबर 1992 जैसी घटना अब दोबारा नहीं हो.

अयोध्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद एक पक्ष ने ज्यादा कुछ कहना मुनासिब नहीं समझा था. अब समय के साथ लोगों ने अपनी आपत्ति भी दर्ज करानी शुरू कर दी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ जेडीयू भले ही संतुष्ट नजर आ रही हो, लेकिन उनके नेता नहीं दिख रहे हैं. 

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पार्टी के वरिष्ठ नेता विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष रहे गुलाम गौस ने अयोध्या मसले को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. गुलाम गौस ने कहा है कि अयोध्या के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन आशंका है कि धर्म की तवा पर रोटी सेंकने वाले लोग अब काशी मथुरा समेत देश के 1200 मस्जिदों पर अपना दावा ठोक देंगे. ये वही लोग हैं जो बाबरी, दादरी, लव जेहाद, तीन तलाक, गौरक्षा और एनआरसी का मुद्दा उठाते रहते हैं.

गौस ने मुस्लिम समाज के लोगों से अयोध्या में मिलनेवाली 5 एकड़ जमीन को भी रामलला के श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला निर्माण में दे देने की अपील की है. देश का इतिहास रहा है कि यहां हिंदु राजाओं ने मस्जिद बनवाने का काम किया था और मुस्लिम राजाओं ने मंदिर बनवाए थे. इसके साथ ही गौस ने केंद्र सरकार से अपील की है कि सरकार ये सुनिश्चित कराए कि देश में 6 दिसंबर 1992 की घटना नहीं दोहराई जाए.

गुलाम गौस ने अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करना की वकालत करने वाले लोगों से अपील की है कि वे मुस्लिम समाज को अपने हाल पर छोड़ दे क्योंकि जितनी जिल्लत होनी थी वह हो चुकी है. अब पुनर्विचार याचिका देने का कोई मतलब नहीं बनता है.

गुलाम गौस के बयान ने एकबार फिर बीजेपी-जेडीयू के बीच की तल्खी को बढ़ा दिया है. पार्टी प्रवक्ता निखिल आनंद ने सीधे तौर पर गुलाम गौस के बयान पर टिपप्णी करने से इनकार कर दिया है. इशारों ही इशारों में गुलाम गौस जैसी सोच रखने वालों पर हमला बोल दिया है. निखिल आनंद ने कहा कि देश की आजादी के बाद मुस्लिम तुष्टीकरण और भयादोहन की राजनीति कांग्रेस करती आई है. बिहार में आरजेडी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है. आज भी कुछ लोग ऐसी ही सोच रखते हैं. उन्हें इस बात से मतलब नहीं है कि अयोध्या फैसले को देश की 124 करोड़ की आबादी ने सराहा है.

वहीं, आरजेडी ने गुलाम गौस को उनके बयान पर आड़े हाथों लिया है. पार्टी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा है कि गौस अपने किये कामों से पीछा नहीं छुड़ा सकते हैं. आज जेडीयू-बीजेपी के साथ सरकार में शामिल हैं. बीजेपी की हर गतिविधी में जेडीयू भागीदार है. ऐसे में मुसलमानों के नाम पर गौस किनारा नहीं कर सकते हैं. अगर उन्हें बीजेपी की नीतियों से इतना ही परहेज है तो वो बीजेपी का साथ छोड़ बाहर निकलें.