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पटना स्थित एम्स के लिए समुचित सुविधाओं की व्यवस्था करे सरकार- जेडीयू

जेडीयू के एक सदस्य ने मंगलवार को राज्यसभा में बिहार के पटना में स्थित अखिल भारतीय चिकित्सा आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में डॉक्टरों, नर्स, उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया और सरकार से तत्काल इस ओर ध्यान देने की मांग की.

पटना स्थित एम्स के लिए समुचित सुविधाओं की व्यवस्था करे सरकार- जेडीयू
एम्स में डॉक्टरों, नर्स, उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: जेडीयू के एक सदस्य ने मंगलवार को राज्यसभा में बिहार के पटना में स्थित अखिल भारतीय चिकित्सा आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में डॉक्टरों, नर्स, उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया और सरकार से तत्काल इस ओर ध्यान देने की मांग की.

शून्यकाल में जेडीयू के रामनाथ ठाकुर ने कहा कि बड़ी संख्या में बिहार से मरीज इलाज करवाने के लिए दिल्ली के एम्स में पहुंचते हैं और यहां उन्हें तथा उनके परिजन को खासी परेशानी का सामना करना होता है. इस परेशानी से मरीज और उनके परिजन बच सकते हैं बशर्ते पटना में स्थित अखिल भारतीय चिकित्सा आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में डॉक्टरों, नर्स, उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं की पूरी व्यवस्था हो.

उन्होंने कहा कि पटना के एम्स में कई विभागों में आज तक ओपीडी भी शुरू नहीं हो पाई है. ठाकुर ने कहा कि दिल्ली के एम्स में इलाज करवाने के लिए बाहर से आने वाले मरीजों में से करीब 35 फीसदी बिहार के होते हैं. उन्होंने सरकार से मांग की कि मरीजों की इस संख्या को देखते हुए वह पटना के एम्स में डॉक्टरों, नर्स, उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं की तत्काल व्यवस्था करे.

विभिन्न दलों के सदस्यों ने उनके इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया. भाजपा के विजयपाल सिंह तोमर ने बढ़ती आबादी का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि दुनिया की कुल आबादी में 17 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले हमारे देश में संसाधन सीमित हैं. इसे देखते हुए जनसंख्या पर नियंत्रण बहुत जरूरी है वरना आने वाले समय में हम कुछ भी कर पाने की स्थिति में नहीं होंगे.

उन्होंने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए मांग की कि देश में बाहर से आने वाले घुसपैठियों को उनके देश वापस भेजा जाना चाहिए ताकि जनसांख्यिकी संतुलन बना रहे और संसाधनों का अंधाधुंध दोहन न होने पाए.

शून्यकाल में ही तृणमूल कांग्रेस की शांता क्षेत्री ने गोरखा समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि 2014 में पश्चिम बंगाल की सरकार ने 11 समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के लिए एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा था. लेकिन अब तक इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं हुई.

तृणमूल कांग्रेस के ही मोहम्मद नदीमुल हक ने बीएसएनएल के कर्मचारियों को प्रबंधन के फैसले की वजह से वेतन न मिल पाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि ऐसी भी खबरें हैं कि अब इन कर्मचारियों की छंटनी की जा सकती है. हक ने सरकार से इस पर तत्काल ध्यान देने की मांग की.

इसी पार्टी के शांतनु सेन ने बीमारियों के इलाज की दर में असमानता का मुद्दा उठाया. कांग्रेस के मोतीलाल वोरा ने चीनी मिलों द्वारा गन्ना किसानों को बकाया भुगतान लंबे समय से न किए जाने का मुद्दा उठाते हुए शून्यकाल में कहा कि अब चीनी मिलें चीनी के दाम बढ़ाने की मांग कर रही हैं. उन्होंने कहा ‘‘अगर ऐसा होता है तो चीनी मिलों के लिए पहले, गन्ना किसानों का बकाया भुगतान करने की समय सीमा तय करनी चाहिए.’’ 

भाजपा के डॉ विकास महात्मे ने केवल उच्चारण की वजह से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को अपेक्षित लाभ न मिल पाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए.

सपा के रेवती रमण सिंह ने उप्र में रह रहे कोल समुदाय के लोगों को जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग की. उन्होंने कहा कि इस समुदाय को झारखंड और मध्यप्रदेश में क्रमश: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है लेकिन उत्तर प्रदेश में वे इस दर्जे से वंचित हैं. इस बारे में उत्तर प्रदेश विधानसभा से प्रस्ताव भी पारित कर भेजा जा चुका है. सरकार को कोल समुदाय की यह मांग पूरी करनी चाहिए. (इनपुट: भाषा)