झारखंडः महागठबंधन ने दिखाई फिर एक जुटता, लेकिन सीटों का ऐलान होली के बाद

झारखंड महागठबंधन के सहयोगी दलों ने दिल्ली में बैठकों के बाद एक जुटता दिखाई है.

झारखंडः महागठबंधन ने दिखाई फिर एक जुटता, लेकिन सीटों का ऐलान होली के बाद
झारखंड महागठबंधन के नेताओं ने दिल्ली में बैठक की है. (फोटो साभारः Twitter)

नई दिल्लीः झारखंड महागठबंधन में शनिवार को कांग्रेस, जेएमएम और जेवीएम प्रमुख एक के बाद एक बैठक करते रहे. जिसमें कई बैठकों में उतार-चढ़ाव महसूस किया गया. लेकिन देर रात महागठबंधन के नेताओं ने एक जुटता दिखाते हुए ऐलान किया कि लोकसभा चुनाव कांग्रेस के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. जबकि विधानसभा चुनाव जेएमएम के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. हालांकि सीटों के बंटवारे पर किसी भी नेता ने कुछ भी नहीं कहा, बल्कि इसकी घोषणा होली के बाद करने की बात कही.

झारखंड में महागठबंधन में हर बार की तरह बैठकों के बाद एक जुटता दिखाई जाती है. लेकिन इसके बाद जो अन्य दलों की नाराजगी सामने आती है इससे फिर घमासान शुरू हो जाता है. शनिवार को हेमंत सोरेन और बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की. हालांकि दोनों नेताओं ने राहुल गांधी से अलग-अलग मुलाकात की. जिसके बाद इस पर सवाल भी खड़े होने लगे.

सियासत में यह सवाल उठने लगे की अगर दोनों नेता दिल्ली में मौजूद हैं तो राहुल गांधी से अलग-अलग मीटिंग क्यों कि, वहीं शनिवार को सुबह से लेकर शाम तक बैठकों का दौर चलता रहा. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार से लेकर प्रभारी आरपीएन सिंह भी बैठकों पर मौजूद थे.

हेमंत सोरेन ने सुबह राहुल गांधी से मुलाकात के बाद ऐलान किया कि सारी बातें हो गई है और ऐलान अब होली के बाद कर दिया जाएगा. लेकिन इसके बाद बाबूलाल मंराडी ने राहुल गांधी से मुलाकत की लेकिन उन्होंने मीडिया से कुछ बात किए बिना ही वहां से निकल गए. ऐसा महसूस किया गया कि उनकी नाराजगी दूर नहीं हुई है.

वहीं, देर रात फिर से सभी दलों ने एक साथ बैठक की. करीब 90 मिनट की बैठक के बाद सभी लोग बाहर निकले और घोषणा करते हुए कहा सारी बातें साफ हो गई है. नेताओं ने कहा कि लोकसभा चुनाव कांग्रेस के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. जबकि विधानसभा चुनाव जेएमएम के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. साथ ही वामदलों के लिए कहा गया कि महागठबंधन में उन्हें एक सीट दी जा सकती है. इसके लिए वह पूरी कोशिश करेंगे.

बहरहाल, झारखंड महागठबंधन के नेताओं ने फिर से एकजुटता दिखाई है लेकिन सीटों को लेकर बात कितनी सुलझ पाई है यह नहीं बताया गया. वहीं, अब वामदलों का स्टैंड भी महागठबंधन को इंतजार होगा. क्योंकि सीपीआई ने कहा है कि अगर उन्हें हजारीबाग सीट नहीं मिली तो वह हजारीबाग समेत अन्य कई दलों पर उम्मीदवार खड़े करेंगे.