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हेमंत सोरेन ने किया मंडल डैम परियोजना को रद्द करने की मांग, कहा- 'नई समीक्षा से बने'

हेमंत सोरेन ने जल बंटवारे के मंडल डैम के दस्तावेज का विरोध करते हुए इसे रद्द करने की मांग की है.

हेमंत सोरेन ने किया मंडल डैम परियोजना को रद्द करने की मांग, कहा- 'नई समीक्षा से बने'
हेमंत सोरेन ने मंडल डैम परियोजना को रद्द करने की मांग की है. (फाइल फोटो)

कुमार चंदन/रांचीः पलामू में 5 जनवरी को पीएम मोदी ने 1972 से लंबित मंडल डैम परियोजना का शिलान्यास किया है. वहीं, नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने मंडल डैम के शिलान्यास को चुनावी स्टंट बताया. साथ ही मौजूदा जल बंटवारे के मंडल डैम के दस्तावेज का विरोध करते हुए इसे रद्द करने की मांग की है. उन्होंने मांग की है कि इसका 75 फीसदी पानी झारखंड को मिले. 

हेमंत सोरेन ने कहा कि इस परियोजना से झारखंड के गांव डूबेंगे. किसान और गरीब बड़े पैमाने पर विस्थापित होगें. सबसे ज्यादा पानी की आवश्यक्ता पलामू प्रमंडल को है क्योंकि सूखा और पलायन सबसे अधिक वहां होता है. लेकिन पलामू में पानी देने के बजाय इसे बिहार पहुंचाया जाएगा.

हेमन्त ने कहा 2019 प्रारम्भ है पूरा साल चुनाव से भरा है अब बीजेपी फिर से अपने झूठे वादे और जुमलों के साथ जनता के बीच आ रही है. राज्य के प्रवासी सीएम शिलान्यास और सत्यानाश को रणनीति में पीएम को भी शामिल कर लिया है. पलामू में मंडल डैम का शिलान्यास फिर से किया गया है. जिसे 1972 से पेंडिंग प्रोजेक्ट को बिना किसी सर्वे और आकलन के शुरू करने का काम किया गया है.

पुराने दस्तावेज को लेकर आगे बढ़ा जा रहा है इस डैम से ज्यादा फायदा बिहार को होना है. बिहार में बीजेपी के सहयोग से सरकार चल रही है नीतीश कुमार उसके मुखिया हैं, लेकिन शिलान्यास में न तो सीएम आए न उनका कोई प्रतिनिधि आया. इससे समझ सकते हैं बिहार में इसको लेकर कितनी उत्सुकता है.

चुनावी दौर के आखिरी समय में बीजेपी वादों के साथ जनता के बीच आती है, मंडल डैम भी इन्हीं जुमलों का एक हिस्सा बनकर रहेगा। मंडल डैम का 75 फीसदी पानी बिहार को मिलेगा और झारखण्ड के 30 से अधिक गांव डूब क्षेत्र में आएगें. 25 से 30 हजार लोग विस्थापित होगें. इस डैम में शहीद नीलाम्बर पीताम्बर का गांव चिमोसेरिया डूबा दिया जाएगा.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा अब यहां की सरकार किसान के भाग्य और भविष्य को लूटने में लगी है. पलामू की जनता इसका पुरजोर विरोध करेगी. हेमन्त ने कहा इसकी समीक्षा होनी चाहिए. उस समय की आबादी और आज के आवादी में फर्क है. साथ ही कहा आपने 5 दिवसीय पलामू प्रमंडल के संघर्ष यात्रा में इस मुद्दे को उठाएगें.