मरांडी ने कहा- ट्विटर पर ही चल रही है झारखंड की सरकार, JMM ने दिया ऐसा जवाब

अनुसूचित जनजाति की 28 में से 26 सीट पर हार के बाद बीजेपी को भविष्य की सियासत के लिए झारखंड में मजबूत आदिवासी चेहरे की जरुरत महसूस होने लगी, तब बाबूलाल मरांडी ने उस जरूरत को खरा उतरते नजर आए. अब नई जिम्मेदारी मिलने से पहले ही बाबूलाल नई पारी में दिखने लगे हैं.

मरांडी ने कहा- ट्विटर पर ही चल रही है झारखंड की सरकार, JMM ने दिया ऐसा जवाब
बाबूलाल मरांडी ने सोरेन सरकार को कहा- ट्विटर पर चलने वाली सरकार तो जेएमएम ने दिया जवाब.

रांची: झारखंड बीजेपी में घरवापसी के बाद बाबूलाल मरांडी को बड़ी जिम्मेदारी मिलना तय माना जा रहा है. बस उस जिम्मेदारी के औपचारिक ऐलान भर का इंतजार है. हेमंत सरकार पर हमलावर हो कर बाबूलाल मरांडी अपनी भूमिका का एहसास भी करा रहे हैं. मौका था, बीजेपी अनुसूचित जनजाति मोर्चा की ओर से बाबूलाल मरांडी के घर वापसी पर स्वागत का, स्वागत समारोह के मौके पर भी बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर हमला बोला.

बाबूलाल मरांडी ने सोरेन सरकार को ट्विटर से चलने वाली सरकार बताया. साथ ही सूबे की कानून व्यवस्था को लेकर भी हेमंत सरकार को घेरा. झारखंड में बीजेपी को विधानसभा चुनाव के बाद विधायक दल की बैठक के लिए तारीख तय करने में लगभग 50 दिन से ज्यादा का वक्त लग गया. सियासी गलियारों में इसकी वजह मुख्यमंत्री के चेहरे रघुवर दास के चुनाव हारने के बाद, सूबे की सियासत के लिए बीजेपी में मजबूत नेता का भाव माना जाने लगा था. 

अनुसूचित जनजाति की 28 में से 26 सीट पर हार के बाद बीजेपी को भविष्य की सियासत के लिए झारखंड में मजबूत आदिवासी चेहरे की जरुरत महसूस होने लगी, तब बाबूलाल मरांडी ने उस जरूरत को खरा उतरते नजर आए. अब नई जिम्मेदारी मिलने से पहले ही बाबूलाल नई पारी में दिखने लगे हैं.

बाबूलाल ने कानून व्यवस्था से लेकर ट्विटर पर सरकार चलाने को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरा तो जेएमएम नेता मनोज पांडेय ने पलटवार करने में तनिक भी देरी नही की. जेएमएम ने कहा कि उन्होंने मान तो लिया सरकार चल रही है. पूर्व में तो सरकार नाम की चीज ही नहीं थी. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह सरकार चलती रही. अब सरकार बेहतर चल रही है. बाबूलाल अब विरोधी दल में जा चुके हैं तो विरोधी दल की भाषा बोलने लगे हैं उन्हें कुछ बोलना है ये उनकी मजबूरी है. 

बाबूलाल मरांडी विधानसभा चुनाव के ठीक बाद हेमंत सरकार को समर्थन दे रहे थे पर परिस्थितियां बदली तो सियासत भी बदल गया. पहले अपने विधायकों को बाहर का रास्ता दिखाया. सरकार से समर्थन बाहर लिया फिर बीजेपी में घरवापसी कर ली. अब नई जिम्मेदारी लगभग मिलने ही वाली है. ऐसे में अभी से ही बाबूलाल ने सरकार को लेकर अपने तेवर तल्ख कर लिए हैं तो सत्ता पक्ष भी आक्रामक है.