मुंगेर: सौन्दर्यीकरण के नाम पर 122 साल पुराना जुबली वेल दफन, लोगों में आक्रोश

नगर परिषद ने करीब 122 साल पुराने जुबली वेल को दफन कर सौन्दर्यीकरण का काम किया जा रहा है. 

मुंगेर: सौन्दर्यीकरण के नाम पर 122 साल पुराना जुबली वेल दफन, लोगों में आक्रोश
लोग धरोहर को बचाने के लिए नगर परिषद के खिलाफ आंदोलन के मूड में हैं.

मुंगेर: सौन्दर्यीकरण के नाम पर ऐतिहासिक धरोहर को बिहार के मुंगेर का जमालपुर नगर परिषद में खत्म किया जा रहा है. नगर परिषद ने करीब 122 साल पुराने जुबली वेल को दफन कर सौन्दर्यीकरण का काम किया जा रहा है. इसे लेकर अब स्थानीय लोगों में आक्रोश ,वही धरोहर को बचाने के लिए नगर परिषद के खिलाफ आंदोलन के मूड में है.

लोगों ने कहा है कि जहां सरकार जल जीवन हरियाली को लेकर सरकार पुराने कुंए और तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करा उसका जीर्णोदार करने में जुटी है वहीं, नगर परिषद जमालपुर के ऐतिहासिक कुएं के अस्तित्व को ही समाप्त करने में जुटी है. इस मामले में नगर परिषद के अधिकारी कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं.

जमालपुर नगर परिषद ने शहरी सौन्द्रीयकरण के नाम पर जमालपुर जुबली वेल के कुए का अस्तित्व समाप्त कर वहां सौंदर्यीकरण कर आर्टिफिशियल फव्वारा लगाने की योजना को जमालपुर नगर परिसद द्वारा बोर्ड द्वारा पारित करवा लिया है. इसपर काम भी चालू कर दिया गया है. वहीं, जब लोगों को पता चला की इस सौंदर्यीकरण के नाम पर इस ऐतिहासिक कुएं को समाप्त किया जा रहा है तो प्रोफेसर देव राज सुमन ने बताया कि नगर परिषद के द्वारा जिस कुएं का अस्तित्व समाप्त किया जा रहा है. 

राज सुमन ने बताया कि उसका ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ धार्मिक महत्व भी है. आजादी के पहले बना ये कुआं आज जमालपुर की एक पहचान है. उन्होंने बताया कि इस कुएं के पानी का इस्तेमाल आस-आस के दुकानदार सहित स्थानीय लोग करते हैं लेकिन नगरपरिषद के द्वारा इस कुएं का अस्तित्व समाप्त कर सौंदर्यीकरण करना कही से न्यायोचित नहीं है.

वहीं, आरजेडी नेता ने इसका विरोध किया और कहा कि अगर नगर परिषद इस आदेश को वापस नहीं लेती तो इसके लिए चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा.