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बाघों की संख्या में इजाफा, बिहार का कैमूर वन क्षेत्र बनेगा टाइगर रिजर्व

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, वाल्मीकिनगर व्याघ्र अभयारण्य क्षेत्र करीब 900 वर्ग किलोमीटर में फैला है. हाल में जारी बाघों की संख्या के आंकड़ों के मुताबिक यहां 31 बाघ हैं.

बाघों की संख्या में इजाफा, बिहार का कैमूर वन क्षेत्र बनेगा टाइगर रिजर्व
कैमूर वन क्षेत्र बनेगा टाइगर रिजर्व.

पटना : बिहार में पश्चिम चंपारण स्थित वाल्मीकि व्याघ्र अभयारण्य क्षेत्र में लगातार बाघों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए अब कैमूर वन क्षेत्र को भी व्याघ्र अभयारण्य क्षेत्र बनाने की पहल प्रारंभ की गई है. इसके तहत कैमूर में अन्य वन्य जीवों को सुरक्षित करने के लिए व्यापक और विशेष ध्यान रखा जा रहा है.

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, वाल्मीकिनगर व्याघ्र अभयारण्य क्षेत्र करीब 900 वर्ग किलोमीटर में फैला है. हाल में जारी बाघों की संख्या के आंकड़ों के मुताबिक यहां 31 बाघ हैं. इसके अलावा तेंदुआ, भालू, हिरण, लोमड़ी, गीदड़, जंगली कुत्ते समेत अन्य शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों की यह आश्रयस्थली है. वन्यजीवों में वृद्धि के कारण यह अभयारण्य अब छोटा पड़ रहा है. यही कारण है कि सरकार अब अन्य क्षेत्रों में बाघ अभयारण्य बनाने पर विचार कर रही है. 

वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, कैमूर जंगल में कई बार बाघ देखे गए हैं, जिसका दावा वन विभाग भी करता है. वन विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि पहले चरण में वन क्षेत्र में बाघों के पदचिह्नें की गिनती की जा रही है. इसके अलावा वहां मौजूद अन्य जानवरों की संख्या की जानकारी सहित अन्य आंकड़े जुटाए जा रहे हैं. इसके बाद यह प्रस्ताव राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनसीटीए) को भेजे जाएंगे. 

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कहा जा रहा है कि अगर सबकुछ सामान्य रहा है और सभी तथ्य अनुकूल पाए गए, तब इसे व्याघ्र अभयारण्य घोषित किया जाएगा. कैमूर के वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास अहलावत ने आईएएनएस को बताया कि अन्य जीव जंतुओं को सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है तथा जंगल पर पूरी तरह से निगरानी रखी जा रही है. उन्होंने दावा किया कि जब अन्य वन्यप्राणी आ जाएंगे, तब बाघ भी आ जाएंगे. 

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वाल्मीकिनगर अभयारण्य क्षेत्र की तुलना में कैमूर वन क्षेत्र का क्षेत्रफल करीब दोगुना है. हालांकि वाल्मीकिनगर अभयारण्य क्षेत्र को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अन्य विकल्प पर भी काम शुरू किया गया है. कैमूर जंगल तीन राज्यों झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश से घिरा हुआ है.