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झारखंडः गढ़वा के खोनहर नाथ मंदिर है हिंदू-मुस्लिम एकता की मिशाल, मुसलमानों की भी गहरी आस्था

300 साल पहले गुफा में स्थापित शिवलिंग जिसकी खोनहर बाबा के नाम से प्रसिद्धि मिली. 

झारखंडः गढ़वा के खोनहर नाथ मंदिर है हिंदू-मुस्लिम एकता की मिशाल, मुसलमानों की भी गहरी आस्था
खोनहरनाथ मंदिर को लेकर मुस्लमानों में भी आस्था है.

गढ़वाः गंगा जमुनी तहज़ीब वाले भारत देश में हर क़दम पर इसका मुजायरा देखते बनता है, कुछ ऐसा ही उदाहरण हमें झारखंड के गढ़वा में देखने को मिलता है. जहां मुसलमानों द्वारा दी गई ज़मीन से गुज़र कर हिंदू अपने आराध्य का दर्शन करते हैं.

गढ़वा-पलामू मुख्य सड़क से कुछ ही दूरी पर बेलहारा गांव पास स्थित खोनहर नाथ मंदिर, जिससे राज्य सहित पड़ोसी राज्यों के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. 300 साल पहले गुफा में स्थापित शिवलिंग जिसकी खोनहर बाबा के नाम से प्रसिद्धि मिली. 

कहा जाता है कि खोनहर बाबा से लोगों की श्रद्धा जुड़ी हुई है. हार बीमारी के साथ किसी भी विपदा में लोग बाबा के नाम का गुहार लगाते हैं. जो सुनी जाती है और वो संकट मुक्त होते हैं. यहां ऐसे तो सालों भर दर्शन और पूजन के लिए लोगों का आना जाना लगा रहता है. लेकिन सावन के हर सोमवार को यहां भव्य पूजा का आयोजन होता है साथ ही मेला भी लगता है. उधर महाशिवरात्रि को भी विशेष पूजा अनुष्ठान किया जाता है.

इस खोनहर नाथ मंदिर से हिन्दू और मुसलमानों के बीच एकता की डोर कितनी मजबूती से बंधी हुई है. इसका सबसे जीवंत मिसाल यह है कि मंदिर तक जाने के लिए दशकों तक लोग खेतों और पगडंडियों से गुज़रते रहे, लेकिन फिर बाद में गांव के मुसलमानों ने खुद पहल करते हुए सड़क निर्माण के लिए जमीन देने की बात कही, एक दिन बैठक हुई और उनके द्वारा जमीन दी गयी. जिसमें तत्काल सड़क का निर्माण हुआ. इसी सड़क से गुज़र कर आज लोग खोनहर नाथ मंदिर पहुंचते हैं. साथ ही लोग यहां तक कहते हैं कि उक्त मंदिर से मुसलमानों की गहरी आस्था है.