Khunti News: झारखंड के खूंटी जिले में पेसा (PESA) कानून को लेकर ग्रामीण और आदिवासी समाज में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता और संघर्ष की भावना बढ़ती जा रही है. पेसा कानून के अभाव में खूंटी जिले के रूढ़िवादी जनजातीय और मूलवासी समुदाय विकास की मुख्य धारा से दूर होते जा रहे हैं. यह कानून न लागू होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र में विकास की कई योजनाओं और पहलों में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे क्षेत्र के लोगों को अपने पारंपरिक अधिकारों का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
इस समस्या के समाधान और ग्रामसभा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से खूंटी जिले में एक दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें जिले भर के ग्राम प्रधानों ने सक्रिय भागीदारी की. इस कार्यशाला का आयोजन रूढ़िजन्य जनजाति समन्वय समिति झारखंड के द्वारा किया गया, जहां पेसा कानून से जुड़ी आवश्यक जानकारियां प्रदान की गईं. ग्राम प्रधानों ने इस दौरान समझा कि कैसे पेसा कानून उनके अधिकारों की रक्षा करता है और इसे लागू कर गांवों के विकास को गति दी जा सकती है.
कार्यशाला में आदिवासी महासभा के अध्यक्ष महादेव मुंडा ने कहा कि झारखंड में पेसा कानून पहले ही लागू हो जाना चाहिए था, लेकिन आज तक इसे लागू नहीं किया गया है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जल्द से जल्द इस कानून को लागू किया जाए, अन्यथा ग्रामीण क्षेत्रों में उग्र आंदोलन की संभावना बढ़ सकती है. महादेव मुंडा ने स्पष्ट किया कि पेसा कानून आदिवासी समाज को उनके पारंपरिक अधिकारों का संरक्षण प्रदान करता है और इसे लागू न करने से विकास बाधित हो रहा है.
पूर्ण चंद्र मुंडा ने बताया कि झारखंड की जनजातियां प्रकृति के अनुरूप जीवन यापन करती हैं, और इस कानून के तहत उन्हें अपने संसाधनों पर अधिकार दिया जाता है, जिससे वे अपनी परंपराओं के अनुसार विकास कर सकें. उन्होंने सभी समुदायों से जागरूकता बढ़ाने की अपील की और कहा कि सरकार को तत्काल पेसा कानून लागू करना चाहिए.
सोम मुंडा ने कहा कि आदिवासियों की पहचान उनकी विरोधी वादी (पारंपरिक) परंपराओं में निहित है. इस परंपरा के अनुसार ही उनके विकास के अधिकारों को मान्यता देने के लिए पेसा कानून बनाया गया है, लेकिन झारखंड में इसे लागू नहीं किया जा सका है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कानून के अभाव में क्षेत्र के लोग विकास के मार्ग से भटक रहे हैं. इसलिए वे सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं कि झारखंड में पेसा कानून जल्द से जल्द लागू किया जाए.
इस प्रकार, खूंटी जिले में पेसा कानून के समर्थन में ग्रामीण और आदिवासी समाज में एक नई चेतना पैदा हो रही है, जो उनके अधिकारों की रक्षा और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत कदम साबित हो सकती है. सरकार से यह उम्मीद जताई जा रही है कि वे जल्द से जल्द इस महत्वपूर्ण कानून को लागू कर ग्रामीण क्षेत्रों को विकास के पथ पर अग्रसर करेंगे.
इनपुट- ब्रजेश कुमार
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