मोतिहारी: सरकारी स्कूल में बच्चों की जान से खिलवाड़, बीच क्लास में बनता है खाना

जी मीडिया की टीम जब स्कूल पहुंची तो व्यवस्था देख दंग रह गई. दो कमरों के स्कूल में लगभग 250 बच्चों का नामांकन है. इन्हें पढ़ाने के लिए आठ शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, लेकिन दो ही शिक्षक उपस्थित दिखे.

मोतिहारी: सरकारी स्कूल में बच्चों की जान से खिलवाड़, बीच क्लास में बनता है खाना
सरकारी स्कूल में बच्चों की जान से खिलवाड़.

पंकज कुमार, मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी (Motihari) के सरकरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की जिंदगी जहां एक तरफ काल के मुंह पर खड़ी है तो दूसरी तरफ बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे नजर आता है. जी हां, मोतिहारी के इस सरकारी स्कूल की यही सच्चाई है. यहां आप अपने घर के चिराग का भविष्य संवारने के लिए पढ़ने भेजते हैं, लेकिन यहां उनकी जिंदगी महफूज नहीं है.

मामला रामगढ़वा प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय सिसवनिया ढाठ का है. यहां बच्चों की जिंदगी और भविष्य दोनों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. जी मीडिया की टीम जब स्कूल पहुंची तो व्यवस्था देख दंग रह गई. दो कमरों के स्कूल में लगभग 250 बच्चों का नामांकन है. इन्हें पढ़ाने के लिए आठ शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, लेकिन दो ही शिक्षक उपस्थित दिखे. बच्चों को स्कूल लाने की जिम्मेदारी जिस टोला सेवक की है वह बच्चों को पढ़ा रहा है. पढ़ाने की जिम्मेदारी जिसकी थी, वे नदारद दिखे.

कक्षा एक से तीन तक के क्लास रूम में गैस का सिलिंडर (Gas Cylinder) बच्चों के बीच रखकर ही मध्याह्न भोजन बनाया जाता है. अनजान और मासूम बच्चों को पता भी नहीं होगा कि जिस स्कूल में वे पढ़ने आए हैं, वहां कभी किसी लापरवाही या अनहोनी की वजह से घटना भी घट सकती है.

स्कूल की ऐसी लापरवाही बच्चों की जिंदगी कभी भी छीन सकती है. ताजुब्ब की बात यह है कि स्कूल की दूरी प्रखंड और बीआरसी से मात्र 500 मीटर की है. फिर भी आजतक स्कूल प्रबंधन की इतनी बड़ी लापरवाही पर वरीय अधिकारियों की नजर तक नहीं गई. क्या किसी बड़े हादसे के इंतजार में हैं वरीय अधिकारी दो कमरों के स्कूल में ढाई सौ बच्चों के बीच आठ शिक्षक की पदस्थापना कहां तक उचित है?