क्या एंटी ट्रैफिकिंग बिल से रुकेगा बाल व्यापार, जानिए इस बिल के बारे में सब कुछ

इस समय बड़े पैमाने पर बच्चे ट्रैफिकिंग का शिकार हो रहे हैं. यानी उन्हें बाल मजदूरी, भिक्षावृत्ति, जबरिया विवाह, देह व्यापार, ड्रग पैडलिंग आदि के लिए खरीदा बेचा जा रहा है.

क्या एंटी ट्रैफिकिंग बिल से रुकेगा बाल व्यापार, जानिए इस बिल के बारे में सब कुछ
इस समय बड़े पैमाने पर बच्चे ट्रैफिकिंग का शिकार हो रहे हैं. (प्रतीकात्मतक तस्वीर)

राजकमल चौधरी, नई दिल्ली: भारत में बच्चों की असुरक्षा बढ़ती जा रही है. मीडिया में हर दिन बच्चों के यौन शोषण, बलात्कार, गुमशुदगी और दुर्व्यापार(ट्रैफिकिंग) आदि की ढेर सारी खबरें पढ़ने को मिलती रहती हैं. इस समय बड़े पैमाने पर बच्चे ट्रैफिकिंग का शिकार हो रहे हैं. यानी उन्हें बाल मजदूरी, भिक्षावृत्ति, जबरिया विवाह, देह व्यापार, ड्रग पैडलिंग आदि के लिए खरीदा बेचा जा रहा है.

ट्रैफिकिंग के ज्यादातर शिकार बच्चे होते हैं. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की वर्ष 2016 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में कुल 15,379 लोग ट्रैफिकिंग के शिकार हुए, जिनमें से 9034 बच्चे थे. ट्रैफिकिंग के शिकार कुल लोगों में बच्चों की संख्या करीब 60 फीसदी है.वर्ष 2016 में 1,11,569 बच्चे गुम भी हुए. माना जाता है कि जबरिया बाल मजदूरी और देह व्यापार आदि के लिए इनका दुर्व्यापार या अपहरण कर लिया गया. हालांकि इनमें से 55,9,44 (पिछले वर्ष के डेटा सहित) बच्चों को खोज लिया गया.

नई पीढ़ी के बचपन को गुलामी से बचाने के लिए कुछ ठोस प्रयास करने होंगे. इस दिशा में एक सार्थक कदम उठाते हुए केंद्र सरकार एक एंटी ट्रैफिकिंग बिल ला रही है. ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन्स (प्रीवेंशन, प्रोटेक्शन एंड रिहैबीलिटेशन) बिल 2018 लोकसभा में पास हो गया है. राज्यसभा में पास होने के बाद देश को ट्रैफिकिंग के खिलाफ एक सख्त कानून मिल जाएगा. फिलहाल यह बिल राज्यसभा में लंबित है.

यह बिल पीड़ित के पुनर्वास के लिए ठोस ढांचागत समाधान प्रस्तुत करता है. इसमें बचाएं गए लोगों की त्वरित सुरक्षा और उनके पुनर्वास की व्यवस्था भी की गई है. पहली बार ट्रैफिकिंग के शिकार लोगों के पुनर्वास के लिए एक कोष की स्थापना का प्रावधान किया गया है. बिल के मुताबिक पीड़ित बच्चा शारीरिक, मानसिक आघात से निपटने के लिए 30 दिनों के भीतर अंतरिम सहायता का हकदार होगा. साथ ही अभियोगपत्र दाखिल होने के 60 दिनों के भीतर ही उसे उचित राहत भी मिलेगी. 

पीड़ित का पुनर्वास अभियुक्त के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई शुरू होने या मुकदमे के फैसले पर निर्भर नहीं करेगा. पुनर्वास कोष का उपयोग पीड़ित के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक देखभाल के लिए होगा. इसमें उसकी शिक्षा, कौशल विकास, स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल, मनोवैज्ञानिक उपचार, कानूनी सहायता और सुरक्षित निवास आदि शामिल हैं. केंद्र से लेकर राज्य और जिला स्तर तक पुनर्वास कार्य के लिए उत्तरदायी ढांचा होगा.

पुनर्वास के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिल में तुंरत न्याय की बात गई है. न्याय पाने के लिए पीड़ितों को लंबा इंतजार करना पड़ता है. लेकिन बिल में समयबद्ध अदालती सुनवाई की बात की गई है.यह समय सीमा एक साल तय की गई है. मुकदमों की तेजी से सुनवाई के लिए प्रत्तेक जिले में विशेष अदालत बनाने का प्रावधान किया गया है. साथ ही पीड़ितों और गवाहों की पहचान को गोपनीय भी रखा जाएगा.

 बिल में तीसरी महत्वपूर्ण बात ट्रैफिकिंग को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ट्रैफिकिंग विरोधी ब्यूरो की स्थापना है. यह ब्यूरो भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत कार्य करेगा और इसका संगठन जिला स्तर तक होगा. साथ ही राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर संगठित गठजोड़ को तोड़ने के लिए ट्रैफिकर्स की संपत्ति की कुर्की जब्‍ती तथा अपराध से प्राप्‍त धन को जब्‍त करने का भी प्रावधान है.