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जानिए क्यों गया को कहते हैं 'मोक्ष की धरती', राम-सीता ने भी किया था राजा दशरथ का पिंडदान

 मान्यता है कि यहां पुरखों के पिंडदान और तर्पण से उन्हें मोक्ष मिलता है. हिंदू धर्म में गया के फल्गु तट पर पिंडदान का खास महत्व बताया गया है. 

जानिए क्यों गया को कहते हैं 'मोक्ष की धरती', राम-सीता ने भी किया था राजा दशरथ का पिंडदान
मान्यता है कि यहां पुरखों के पिंडदान और तर्पण से उन्हें मोक्ष मिलता है.

समीर वाजपेयी, गया: बिहार (Bihar) के गया को 'मोक्ष की धरती' भी कहते हैं. मान्यता है कि यहां खासकर पितृ पक्ष में पुरखों के पिंडदान और तर्पण से उन्हें मोक्ष मिलता है. हिंदू धर्म में गया के फल्गु तट पर पिंडदान का खास महत्व बताया गया है. गरुड़ पुराण में भी गया का जिक्र है, जिसमें लिखा है कि गया की तरफ उठा एक-एक कदम पितरों को स्वर्ग पहुंचाने की सीढ़ी बनाता है. 

मानव जीवन में देव, गुरु और पितृ ये तीन ऋण माने जाते हैं और पितृ ऋण की मुक्ति के लिए गया में तर्पण ही एकमात्र उपाय है. इसके पीछे एक कहानी भी है, कहते हैं कि गयासुर राक्षस ने कठोर तप कर ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और वरदान मांगा कि उसके दर्शन से ही लोग पाप मुक्त हो जाएं. 

 

वरदान का असर ये हुआ कि लोग अधिक पापी हो गए और पाप से छुटकारा के लिए गयासुर के दर्शन कर लेते थे. स्वर्ग में लोगों की तादाद बढ़ने लगी, जिसके बाद देवताओं ने एक युक्ति सोची और गयासुर से यज्ञ के लिए उसका शरीर मांग लिया. गयासुर ने अपना शरीर तो देवाताओं को दे दिया लेकिन साथ ही एक वरदान मांगा कि वह जहां भी रहे उस जगह पर पाप का नाश हो जाए. 

गयासुर जहां लेटा वो जगह आज गया के नाम से जाना जाता है. जो भी श्रद्धालु यहां पिंडदान और तर्पण करते हैं उनके पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि जिनकी मृत्यु हो जाती है उनकी आत्मा किसी भी लोक में हो वो श्राद्ध पखवाड़े में पृथ्वी पर आती है और उनके वंशजों के द्वारा पिंडदान और तर्पण से ही उन्हें मुक्ति मिलती है. 

कहते हैं कि रामायणकाल में भगवान राम और सीता ने भी राजा दशरथ के लिए गया में ही पिंडदान किया था, जिसके बाद राजा दशरथ की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. पितृपक्ष में एक दिन, सात दिन, पंद्रह दिन और सत्रह दिन का कर्मकांड होता है. आग, पानी और अन्न से श्राद्ध करने पर पितरों को मुक्ति मिलती है. वैसे तो यहां सालों भर तर्पण के लिए लोग आते हैं लेकिन आश्विन माह के कृष्ण पक्ष को शुभ माना जाता है और इस समय यहां लाखों की तादाद में लोग अपने पितरों की मुक्ति के लिए आते हैं.