लॉकडाउन में मजदूरों की खूब हो रही है दुर्दशा, भूखे पेट पैदल ही निकल पड़े हैं घर की ओर

मजदूर कहते हैं कि उनके पास ना ही समुचित खाने पीने की व्यवस्था और ना पैसे हैं भगवान का नाम लेकर चल दिए हैं अपने गांव की ओर.    

लॉकडाउन में मजदूरों की खूब हो रही है दुर्दशा, भूखे पेट पैदल ही निकल पड़े हैं घर की ओर
लॉकडाउन की वजह से मजदूरों की हो रही है दुर्दशा, पैदल ही चल पड़े हैं अपने घर की ओर. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बाढ़: पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है और यह लॉकडाउन आगामी 14 अप्रैल तक जारी रहेगा. इस बीच सभी परिचालन ठप पड़ गए हैं. जो मजदूर अपने घर से करीब 300 किलोमीटर दूर मजदूरी कर रहे थे, उनके घर लौटने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. 

यह मजदूर भागलपुर और बांका जिले से आकर पटना में मजदूरी कर रहे थे जो अब पैदल अपने घर वापस लौटने के प्रयास में जुटे हुए हैं.

घर से दूर आ कर मजदूरी कर अपने पेट पालने को मजबूर इन मजदूरों के पास कोई और विकल्प बचा नहीं है. लॉकडाउन के बाद इनके काम प्रभावित हुए हैं और इन्हें न तो मेहनताना मिल पा रहा है और न ही खाने के लिए राशन. ऐसे में घर से दूर मजदूर पूरी तरह से फंस चुके हैं.

मजदूर कहते हैं कि उनके पास ना ही समुचित खाने पीने की व्यवस्था और ना पैसे हैं भगवान का नाम लेकर चल दिए हैं अपने गांव की ओर.    

बता दें कि 4 दिन पहले बाढ़ रेलवे स्टेशन से सटे  बाढ़ हॉल्ट के पास रेलवे लाइन के किनारे पटना से पश्चिम बंगाल जा रहे यात्री ताला मुरमुर नामक मजदूर की की मौत हो गई थी. बहुत से मजदूर भूखे पेट घर की तरफ पैदल ही निकल चुके हैं. 

हालांकि, समस्या बहुत विकट न हो जाए, इसको देखते हुए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री राहत कोष से 100 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं. हर जिले में आपदा राहत केंद्र के जरिए इनकी मदद की जा सकती है.