पटना: स्मार्ट सिटी के कई प्रोजेक्ट्स पर लगा ग्रहण, फंड के अभाव में काम अटका

पटना का चयन स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत केन्द्र सरकार ने 2017 में किया और इसी कड़ी में पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड की स्थापना 9 नवंबर 2017 को हुई. करोड़ों की परियोजनाओं का टेंडर हुआ और तेजी से काम भी शुरू होने लगा. बीते कुछ महीने से परियोजनाओं की रफ्तार थम सी गई है.

पटना: स्मार्ट सिटी के कई प्रोजेक्ट्स पर लगा ग्रहण, फंड के अभाव में काम अटका
फंड के अभाव में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर लगा ग्रहण.

पटना: बिहार की राजधानी पटना (Patna) को खूबसूरत बनाने के मकसद से इसका चयन केन्द्र सरकार ने स्मार्ट सिटी (Smart City Project) के तौर पर किया. जोर-शोर से काम भी शुरू हुआ, लेकिन आज स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स की कुछ परियोजना पर काम बंद हो चुका है तो कुछ की रफ्तार धीमी है. स्मार्ट सिटी को लेकर राजधानी के लोगों ने जो सपना संजोया था वो कब पूरा होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. दूसरी तरफ शीर्ष अधिकारियों के ट्रांसफर का असर भी काम पर देखा जा रहा है.

पटना कॉलेज के ठीक पीछे और गंगा रिवर फ्रंट के किनारे आधे-अधूरे हालात में खड़ी इमारत को डच कैफे के रूप में बनाया जाना था. काफी जोर-शोर से डच कैफे के लिए काम शुरू भी हुआ था, लेकिन फिलहाल यहां काम बंद है.

जानकारी के मुताबिक, फंड की कमी के कारण ऐसा हुआ है. फंड की कमी दूर करने के लिए नगर विकास विभाग को पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने चिट्ठी लिखी है. अगर ये डच कैफे बनकर तैयार होता तो रिवर फ्रंट घूमने आए लोगों के लिए खान-पान के लिए बेहतर जगह मिल जाता, लेकिन अब ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है.

पटना का चयन स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत केन्द्र सरकार ने 2017 में किया और इसी कड़ी में पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड की स्थापना 9 नवंबर 2017 को हुई. करोड़ों की परियोजनाओं का टेंडर हुआ और तेजी से काम भी शुरू होने लगा. बीते कुछ महीने से परियोजनाओं की रफ्तार थम सी गई है. हालांकि पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड के चेयरमेन संजय कुमार अग्रवाल इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं. उनके मुताबिक, जलजमाव के बाद पटना के हालात बदले हैं और परियोजनाओं पर इस तरीके से काम होगा, जिससे जलजमाव की स्थिति दोबारा नहीं हो. उनका मानना है कि स्मार्ट सिटी की कई परियोजनाओं की समीक्षा हो रही है और नगर विकास विभाग से मिलकर सभी योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा.

पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत गांधी मैदान में बड़ी साइज की स्क्रीन लगनी थी. ताकि लोग मैदान में बैठकर ही मैच या फिल्मों का लुत्फ उठा सकें. इसी के तहत कई महीने पहले ही स्क्रीन से जुड़े दूसरे उपकरण स्थापित किए गए. लेकिन उसके बाद से मेगा साइज स्क्रीन पर काम आगे नहीं बढ़ा है. इसके साथ ही गांधी मैदान के आसपास की सभी सरकारी, निजी और व्यवसायिक इमारतों को एक ही थीम पर एलइडी लाइट से रौशन किया जाना था. बड़ी इमारत पर वीडियो वॉल लगाया जाना था, लेकिन अब इसके लिए दूसरी बार टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत ही अदालतगंज में तालाब का निर्माण होना था. 9 करोड़ से ज्यादा की लागत वाली इस परियोजना के खत्म होने की समय सीमा अप्रैल 2020 है. तालाब खाली कराने के बाद इसमें दोबारा पानी भर गया है. फिलहाल अदालतगंज तालाब साइट पर कुछ हलचल जरूर दिखी. बीरचंद पटेल पथ यानी वो रास्ता जिसके दोनों छोर पर भारतीय जनता पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड के ऑफिस है, यहां काम जरूर तेजी से चल रहा है.

पटना के लोग भी मानते हैं कि कुछ महीने पहले तक जिस पटना में जगह-जगह काम होता दिखाई दे रहा था वो हलचल अब उन्हें नहीं दिखता है. दूसरी ओर पटना नगर निगम से जुड़े प्रतिनिधि की अपनी शिकायत है. उनके मुताबिक, अगर कोई काम उनके अपने-अपने वार्ड में होता है तो उन्हें बताया तक नहीं जाता है.

अगर समय से डच कैफे, गांधी मैदान में मेगा स्क्रीन, गांधी मैदान के पास वीडियो वॉल बनकर तैयार होता तो यकीनन पटना की एक अलग तस्वीर देखने को मिलती. लेकिन कभी फंड का रोना तो कभी टेंडर और फिर रिटेंडर जैसी चीजें पटना को स्मार्ट बनने में रोड़े अटका रही हैं.