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जमशेदपुरः दवाईयों की किल्लत से जूझ रहा है MGM अस्पताल, मरीज हैं परेशान

झारखंड के जमशेदपुर में स्थित सूबे का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमजीएम की स्वास्थ्य व्यवस्था सफेद हाथी साबित हो रहा है. 

जमशेदपुरः दवाईयों की किल्लत से जूझ रहा है MGM अस्पताल, मरीज हैं परेशान
एमजीएम अस्पताल में मरीजों को नहीं मिल रही है दवाईयां. (फाइल फोटो)

जमशेदपुरः स्वास्थ्य सुविधाओं और बदहाल व्यवस्था को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाला कोल्हान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमजीएम पिछले साल भर से दवाईयों की भारी कमी से जूझ रहा है. रोजाना यहां आने वाले तकरीबन डेढ़ हजार मरीजों को डॉक्टरी सलाह के बाद इक्का-दुक्का दवाएं ही मुश्किल से मिल पाती है. ऐसे में सक्षम मरीज बाहर से दवाई तो खरीद लेते हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों का हाल बेहाल है.

झारखंड के जमशेदपुर में स्थित सूबे का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमजीएम की स्वास्थ्य व्यवस्था सफेद हाथी साबित हो रहा है. आये दिन अस्पताल में कभी बेड की कमी से मरीज को फर्श पर लिटा कर इलाज किया जाता है, तो कभी बेहतर इलाज की कमी से मरीजों की मौत पर परिजनों के बवाल के मामले सुर्खियों में होती हैं.

चिकित्सकों की भारी कमी और उन्नत स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर यहां के विभागों में लगी मशीनें दक्ष कर्मचारियों की कमी से धूल फांकती नजर आती है. पिछले साल भर से अस्पताल में दवाइयों की भारी कमी है. मरीज आते है. डॉक्टर उनकी बीमारी नब्ज पकड़ पर्ची पर दवाएं लिखते है. दवाई की काउंटर पर घण्टों कतार में खड़े रहने के बाद बताया जाता है कि दवाएं नही हैं, बाहर से खरीद लें. ऐसा भी नही है, कुछ एक दवाएं अस्पताल के दवाई केंद्र में है भी और जिन मरीजों को मिलता है वो अपने को भाग्यशाली मानते है. लिहाजा मरीजों में सरकार और अस्पताल प्रबंधन के प्रति नाराजगी साफ दिखती है.

दवाइयों की भारी किल्लत को लेकर जब हमने अस्पताल के उपाधीक्षक से व्यवस्था को लेकर सवाल किया तो जवाब भी साफ शब्दों में मिला कि अस्पताल में दवाएं रांची से और कुछ यहां से ही खरीदा जाता है. दवाएं आती है खत्म हो जाती है. 

उन्होंने कहा कि दवाईयों की किल्लत को लेकर कई बार स्वास्थ्य विभाग को लिखा गया है, आवंटन आने के बाद ही मरीजों को दवाएं मिल पाएगी. नियमित दवाएं आवंटन नहीं होने से परिस्थितियों के अनुरूप हमें काम करना पड़ता है. बाकी यह मसला सरकार से जुड़ा है, ज्यादा कुछ नही बोल सकते.

कुल मिलाकर सरकार से एमजीएम अस्पताल को विभिन्न रोगों से संबंधित औषधि नही मिल पाती है. जिसका खामियाजा मरीजों को झेलना पड़ रहा है और मरीजों का कोपभाजन अस्पताल प्रबंधन को उठाना पड़ता है. ऐसे में यहां आने वाले मरीजों में सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करना भी लाजमी है. 

जरूरत है कि कोल्हान के सबसे बड़े इस सरकारी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर नए सिरे से नीतिगत फैसले लेकर उन्नत व्यवस्था बहाल करना क्योंकि किसी भी प्रान्त की स्वास्थ्य व्यवस्था पर वहां रह रहे लोगों की स्वास्थ बेहतर की जिम्मेवारी होती है ताकि स्वस्थ बन कर सूबे की आवाम स्वस्थ जीवन की बदौलत राज्य के विकास में अहम भागीदार बन सकें.