बिहार: गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ पंचतत्व में विलीन, लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

जैसे ही गणितज्ञ का शव महुली घाट पहुंचा वैसे ही सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जयकुमार सिंह के साथ कई अन्य नेता भी महुली घाट पहुंच गए. इन सभी लोगों ने पहले श्रद्धांजलि अर्पित की.

बिहार: गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ पंचतत्व में विलीन, लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई
महान गणितज्ञ को लोगों ने दी अंतिम विदाई.

आरा: भोजपुर जिले में आज सुबह सूरज की किरणें निकलते ही लोगों ने नम आंखों से महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह (DR. Vashishtha Narayan Singh) को विदाई दी. अंतिम दर्शन करने के लिए उनके गांव बसंतपुर में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. हर कोई अंतिम दर्शन के लिए लालायित था. राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. चारों तरफ 'भारत माता की जय' और 'डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह की जय' का जयघोष हो रहा था.

जैसे ही गणितज्ञ का शव महुली घाट पहुंचा वैसे ही सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जयकुमार सिंह के साथ कई अन्य नेता भी महुली घाट पहुंच गए. इन सभी लोगों ने पहले श्रद्धांजलि अर्पित की. उसके बाद जिला प्रशासन ने गार्ड ऑफ ऑनर के साथ 123 राइफल की सलामी देकर उन्हें अंतिम विदाई दी.

भतीजा मुकेश कुमार ने उनको मुखाग्नि दी. परिवार में काफी आक्रोश भी देखने को मिला. इस मौके पर लोग यही कहते हुए मिले कि मरने से पहले उनको किसी ने नहीं पूछा और मरने के बाद के तामझाम की व्यवस्था कर उनको विदाई दी गई. अगर इसी तरह का सम्मान उनको जीते जी मिलता तो शायद गणितज्ञ की स्थिति यह नहीं होती. कुछ लोगों ने तो सरकार को जमकर कोसा.

कई लोगों ने इस दौरान गणितज्ञ को देश की शान बताया और उनके कई संस्मरण सुनाए. देश से लेकर विदेश तक में भोजपुर के इस गांव का नाम रौशन करने वाले सिंह का पार्थिव शरीर गुरुवार को भोजपुर जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर बसंतपुर गांव स्थित उनके पैतृक आवास लाया गया था. उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए शुक्रवार सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा. हर कोई मानो उनके अंतिम दर्शन कर उनसे आशीर्वाद लेना चाह रहा हो. 

वशिष्ठ नारायण सिंह का गुरुवार को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में निधन हो गया था. वह पिछले 40 सालों से सिजोफ्रेनिया बीमारी से पीड़ित थे. शुक्रवार सुबह सिंह की शव यात्रा निकाली गई. शव यात्रा में जन सैलाब उमड़ पड़ा था. शव यात्रा में शामिल लोग 'डॉ. वशिष्ठ अमर रहे', 'जब तक सूरज चांद रहेगा, तब तक वशिष्ठ सिंह का नाम रहेगा' जैसे नारे लगाते रहे. 

डॉ. सिंह के पार्थिव शरीर के महुली घाट पहुंचने के बाद पूरे रीति-रिवाज और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. इस मौके पर भोजपुर जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.