चिराग पासवान ने एससी-एसटी मुद्दे पर बढ़ायी केंद्र सरकार की मुश्किलें

अनुसूचित जाति-जनजाती कानून पर फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एके गोयल को एनजीटी अध्यक्ष बयाने जाने के बाद एलजेपी नेता ने सवाल उठाए हैं. 

चिराग पासवान ने एससी-एसटी मुद्दे पर बढ़ायी केंद्र सरकार की मुश्किलें
चिराग पासवान ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है. (फाइल फोटो)

पटनाः अनुसूचित जाति-जनजाती कानून पर फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एके गोयल को एनजीटी अध्यक्ष बयाने जाने के बाद एलजेपी नेता ने सवाल उठाए हैं. एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान के बेटे और सांसद चिराग पासवान ने एससी-एसटी मामले पर पीएम मोदी को पत्र लिखा है. इससे सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती है.

चिराग पासवान ने पीएम के नाम खत लिखकर कहा कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के जज एके गोयल ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर फैसला सुनाया गया था. इससे अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय में असंतोष और आक्रोश हैं. सरकार द्वारा अतिशीघ्र जस्टिस (रिटायर्ड) एके गोयल को एनजीटी चेयरमैन पद से बर्खास्त किया जाए.

चिराग पासवान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग ने दो फरवरी को आंदोलन के दौरान उग्र प्रदर्शन किया था, जिसके चलते जानमाल का काफी नुकसान हुआ था और हमारी एनडीए सरकार के खिलाफ अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों में बिना वजह अविश्वास का माहौल बना. एक बार फिर से अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग ने 9 अगस्त को भारत बंद का आह्वान किया है. इस बार प्रदर्शन और ज़्यादा उग्र होने की संभावना जताई जा रही हैं, जिसको देखते हुए हमें उचित कदम उठाने की आवश्यकता है.

LJP Leader Chirag Paswan wrote letter to PM Modi on SC-ST Issue

चिराग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जिस जज एके गोयल ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर फैसला सुनाया था, उन्हें रिटायरमेंट के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का चैयरमेन बनाया गया है. सरकार के इस फैसले से अनुसूचित जाति और जनजातीय में संदेश गया कि सरकार ने SC/ST के खिलाफ फैसला सुनाने के लिए जस्टिस एके गोयल को पुरस्कृत किया है.

चिराग पासवान ने पीएम मोदी के सामने रखी ये मांगें

>>सरकार द्वार जल्द जस्टिस एके गोयल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरमैन पद से सरकार तुरंत बर्खास्त करे.

>>संसद के जारी मानसून सत्र में विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रभाव से अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के कानूनी सुरक्षा की व्यवस्ता को बहाल किया जाए. अगर इसमें कोई अड़चन है तो संसद के चालू सत्र को दो दिन पहले खत्म कर एक अध्यादेश लाया जाए.

चिराग पासवान की इस चिट्ठी से सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती है. वहीं, एसी-एसटी मुद्दा पहले से ही संवेदनशील रहा है. ऐसे में एके गोयल को एनजीटी के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग को लेकर सरकार दुविधा में फंस सकती है.