close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

झारखंड: राजमहल सीट को लेकर समझौते के मूड में नहीं स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता, प्रदेश अध्यक्ष का विरोध शुरू

 13 अक्टूबर को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के आने से पूर्व ही साहिबगंज के कांग्रेसी नेताओं के विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं. साहिबगंज के कांग्रेसी नेता राजमहल विधानसभा पर किसी प्रकार की समझौता करने के मूड में नहीं है.

झारखंड: राजमहल सीट को लेकर समझौते के मूड में नहीं स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता, प्रदेश अध्यक्ष का विरोध शुरू
13 अक्टूबर को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के आने से पूर्व ही साहिबगंज के कांग्रेसी नेताओं के विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं.

साहेबगंज: झारखंड विधानसभा चुनाव में राजमहल विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए हॉट केक के रूप में सामने हैं. 13 अक्टूबर को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के आने से पूर्व ही साहिबगंज के कांग्रेसी नेताओं के विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं. साहिबगंज के कांग्रेसी नेता राजमहल विधानसभा पर किसी प्रकार की समझौता करने के मूड में नहीं है. यहां तक कि राजमहल सीट कांग्रेस को नहीं मिलने पर साहिबगंज से कांग्रेस की वजूद मिट जाने तक की धमकी दे रहे हैं.

कांग्रेस जिला अध्यक्ष इस बात को मानते हैं कि कांग्रेस साहिबगंज जिला में काफी कमजोर हो चुकी है. महज दो से तीन प्रखंडों में ही कांग्रेस संगठन के रूप में मजबूत है और ऐसे में यदि पार्टी के झंडा को बनाए रखना है तो राजमहल विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार देनी चाहिए.

वहीं, कांग्रेस के प्रदेश सचिव अनिल ओझा बताते हैं कि राजमहल विधानसभा आजादी के बाद से कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है लेकिन पिछले कुछ वर्षों से गठबंधन की गानों की वजह से राजमहल सीट कांग्रेस खाते में नहीं आ रही है. जिससे साहिबगंज में कांग्रेस के वजूद मिटने के कगार में वही कांग्रेस के प्रदेश महासचिव बजरंगी प्रसाद यादव ने कहा कि साहिबगंज जिला से राजमहल लोकसभा सीट पर जेएमएम को कांग्रेस ने सपोर्ट करके सांसद बनाया. 

वहीं, साहिबगंज का दो आरक्षित बोरियों और बरहेट पहले से जेएमएम के कब्जे में हैं और राजमहल विधानसभा पर कभी भी नहीं जीत पाई है. ऐसे में राजमहल विधानसभा सीट पर कांग्रेस की दावेदारी बनती है और यदि राजमहल सीट से कांग्रेस उम्मीदवार नहीं देती है तू साहिबगंज में कांग्रेस का झंडा उठाने वाला कोई नहीं होगा.

साहिबगंज जिला में पिछले कई वर्षों से कांग्रेस पार्टी को प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला है. इस विधानसभा चुनाव में भी यदि कांग्रेस राजमहल विधानसभा से उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारती है, तो साहिबगंज जिले में कांग्रेस की स्थिति और भी बुरी हो सकती है.