रिटायर होते ही 'लवगुरु' मटुकनाथ बोले- 'चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी'

मटुकनाथ रिटारमेंट के बाद खुद को जवान महसूस कर रहे हैं और सबसे पहले शादी करना चाहते हैं. 

रिटायर होते ही 'लवगुरु' मटुकनाथ बोले- 'चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी'
रिटायर हुए मटुकनाथ चौधरी. (तस्वीर- Facebook)

पटना : अपने से 30 वर्ष छोटी शिष्या के साथ प्रेम प्रसंग को लेकर मशहूर हुए पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी 40 वर्ष की नौकरी के बाद रिटायर हो गए हैं. रिटायरमेंट के बाद भी मटुकनाथ खुद को जवान महसूस कर रहे हैं. उन्होंने खुद को 65 वर्ष का लड़का बताया. साथ ही उन्होंने रिटायरमेंट के बाद की योजना भी अपने प्रशंसको के बीच रखी है. उन्होंने कहा, 'जवानी के दिनों में जो काम किए वही अब भी करेंगे, क्योंकि मेरे अंग-अंग से यौवन की उमंग छलक रही है.'

मटुकनाथ रिटारमेंट के बाद सबसे पहले शादी करना चाहते हैं. जब लोगों ने उनसे पूछा कि रिटायरमेंट के बाद आपका क्या प्लान है, तो उन्होंने कहा 'विदा हुआ वह मटुकनाथ जो योजना बनाता था और उसे पूरा करने में लहू सुखाता था. अब हम केवल मस्ती करेगा. सबसे पहले हम ब्याह करेगा. इसलिए आपलोगों का दायित्व है कि एक सुटेबल कन्या से मेरा ब्याह कराइये, फिर मेरी चाल देखिए. विवाह के पहले कुछ नहीं करने का. कुछ नहीं सोचने का.'

रिटायरमेंट के बाद लिखा गया मटुकनाथ का फेसबुक पोस्ट :

चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी

मैं 65 वर्ष का लरिका (लड़का) हूं! मेरी जवानी ने अभी अंगड़ाई ली है! मेरे अंग-अंग से यौवन की उमंग छलक रही है! जब मैं मस्त होकर तेज चलता हूं तो लोग नजर लगाते हैं! दौड़ता हूं तो दांतों तले उंगली दबाते हैं!
अब हम कैसे चलीं डगरिया
लोगवा नजर लगावेला!
मेरी खुशनसीबी कि इस चढ़ती जवानी में रिटायर हो रहा हू! लोग पूछते हैं कि रिटायरमेंट के बाद क्या कीजिएगा? 
चढ़ती जवानी में जो किया जाता है, वही करूंगा!
मतलब?
मतलब यह कि मैं ब्याह करूंगा! बरतुहार बहुत तंग कर रहे हैं! उनकी आवाजाही बढ़ गई है! लेकिन मैं एक अनुशासित, शर्मीला और परंपरा प्रेमी लरिका हूं! इसलिए खुद बरतुहार से बात नहीं करता हूं! उन्हें गार्जियन के पास भेज देता हूं! मेरे विद्यार्थी ही मेरे गार्जियन हैं! वे जो तय कर देंगे, आंख मूंदकर मानूंगा! उनसे बड़ा हितैषी मेरा कोई नहीं हो सकता! 
हंसी-मजाक छोड़िए! बताइये कि रिटायरमेंट के बाद क्या योजना है? क्योंकि आप जो योजना बनाते हैं, उसे पूरा करके ही दम मारते हैं!

विदा हुआ वह मटुकनाथ जो योजना बनाता था और उसे पूरा करने में लहू सुखाता था! अब हम केवल मस्ती करेगा! सबसे पहले हम ब्याह करेगा! इसलिए आपलोगों का दायित्व है कि एक सुटेबल कन्या से मेरा ब्याह कराइये, फिर मेरी चाल देखिए! विवाह के पहले कुछ नहीं करने का! कुछ नहीं सोचने का!
 
आज मेरा रिटायरमेंट डे है! वास्तव में यह मेरा स्वाधीनता दिवस है! व्यर्थ के कार्यों से मुक्ति मिलने का आनंद मेरी रगों में दौड़ रहा है! विश्वविद्यालय के क्लास बकवास हैं! विद्यार्थियों की प्रतिभा कुंद करने के सिवा वहां कोई रचनात्मक काम संभव नहीं! खुशी इस बात की है कि इस हिंसात्मक शिक्षा में जुटे रहने की बाध्यता से मुक्ति मिल रही है! अब मैं जिस दिशा में कदम रखूंगा, वह वास्तविक शिक्षा होगी! किंतु, मैं कोई योजना बनाकर उसे पूरा करने के तनाव में नहीं पड़ूंगा! मन की तरंग पर सवार होकर उड़ूंगा! अस्तित्व जो करवाना चाहेगा, उसी की इच्छा में अपनी इच्छा को लय करूंगा! 

आत्म-सुख मेरी प्राथमिकता होगी! मेरी समझ है कि केवल सुखी व्यक्ति दूसरों को सुख पहुंचाने में सहायक हो सकता है! समाज, देश और दुनिया को बदलने का नारा विशुद्ध धोखा है!

ज्ञात हो कि अपने प्रेम प्रसंग को लेकर मटुकनाथ युवाओं के बीच में खूब मशहूर हुए. उन्हें नौकरी से बर्खास्तगी भी झेलनी पड़ी थी, लेकिन बाद में उन्हें फिर से बहाल किया गया था. अभद्रता और कदाचार के आरोप में पटना विश्वविद्यालय ने उन्हें निलंबित कर दिया था और बाद में बर्खास्त भी. मटुकनाथ हिंदी विषय के प्रोफेसर थे.