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नीतीश कुमार के नाम पर बिखर गया महागठबंधन, एकजुटता फिर हुई नाकाम

नीतीश कुमार के मसले पर महागठबंधन के घटक दलों के सुर अलग-अलग नजर आ रहे हैं. रविवार को महागठबंधन की हुई प्रेस कान्फ्रेंस में इसकी झलक भी देखने को मिली.

नीतीश कुमार के नाम पर बिखर गया महागठबंधन, एकजुटता फिर हुई नाकाम
नीतीश कुमार के मसले पर महागठबंधन के घटक दलों के सुर अलग-अलग नजर आ रहे हैं.

पटना: महागठबंधन की एकजुटता दिखाने की कोशिश एकबार फिर नाकाम साबित हुई है. नीतीश कुमार के मसले पर महागठबंधन के घटक दलों के सुर अलग-अलग नजर आ रहे हैं. रविवार को महागठबंधन की हुई प्रेस कान्फ्रेंस में इसकी झलक भी देखने को मिली. कांग्रेस जहां नीतीश कुमार को लेकर पॉजिटिव दिखी वहीं उपेन्द्र कुशवाहा ने महागठबंधन में नीतीश कुमार के रास्ते बंद होने के संकेत दिए. यहां तक कि आरजेडी और हम पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता भी महागठबंधन की प्रेस कान्फ्रेंस में नहीं पहुंचा.

लोकसभा चुनाव में फेल हो चुके महागठबंधन को एकबार फिर एकजुट करने की कवायद की जा रही है. एकजुटता दिखाने के लिए 12 अक्टूबर को महागठबंधन की ओर से राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथी ज्वाईंट रुप से मनाई जा रही है. उपेन्द्र कुशवाहा ने इसकी पहल की है. रविवार को कार्यक्रम के जरिये एकजुटता दिखाने के लिए महागठबंधन की प्रेस कान्फ्रेंस सदाकत आश्रम में बुलायी गई. लेकिन महागठबंधन एकजुट होने से पहले ही बिखरा-बिखरा नजर आया. प्रेस कान्फ्रेंस में आरजेडी का न तो बडा कोई नेता नजर आया और न ही जीतन राम मांझी की पार्टी ने अपनी ओर से किसी बडे नेता प्रेस कान्फ्रेंस में भेजा. आरएलएसपी से उपेन्द्र कुशवाहा , वीआईपी पार्टी के मुकेश सहनी कांग्रेस के अध्यक्ष मदन मोहन झा और सांसद अखिलेश सिंह मौजूद रहे.

 

उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि महागठबंधन एकजुट है. देश के हालात को देखते हुए हमलोगों ने लोहिया जी की पुण्यतिथी संयुक्त रुप से मनाने का फैसला लिया है. इस कार्यक्रम में महागठबंधन के सभी नेता शामिल होंगे. इस कार्यक्रम के जरिये महागठबंधन की एकजुटता भी देखने को मिलेगी और बिहार की जनता को न्याय दिलाने का रास्ता भी प्रसस्त होगा.

लेकिन नीतीश कुमार के मसले पर भरी प्रेस कान्फ्रेंस में ही महागठबंधन बिखड गया. नीतीश कुमार को महागठबंधन में शामिल कराने के सवाल पर उपेन्द्र कुशवाहा और कांग्रेस की सोच में फर्क नजर आ गया. उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार को तो अब जनता ही नकार रही है तो मेरी बात क्या करना है. बीते 15 सालों में न तो स्कूल में शिक्षा का इंतजाम हुआ , न अस्पतालों में गरीबों के लिए दवा उपलब्ध हो सकी और न ही नौजवानों को रोजगार मिल सका है. 

वहीं, कांग्रेस ने नीतीश कुमार के लिए संभावनाओं के द्वार खोले रहने के संकेत दिये. पार्टी के सांसद अखिलेश सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को लेकर जो भी सवाल पूछे जा रहे हैं उसका जवाब महागठबंधन के साथी तभी दे पाएंगे जब नीतीश कुमार बीजेपी का साथ छोड सरकार से अलग होंगे. वहीं, अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा कि पहले नीतीश कुमार की ओर से कोई ऑफर आए तब तो. नीतीश कुमार की तरफ से कोई ऑफर आएगा तो हम आलाकमान से इस मामले पर विचार करेंगे.