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मन्नत पूरा होने पर कबूल लिया था इस्लाम, मरने के बाद दाह संस्कार को लेकर हुआ विवाद

70 वर्षीय रेलवे कर्मचारी सुरेश तांती ने 2013 में धर्म परिवर्तन के लिए स्थानीय कोर्ट में एफिडेविट दाखिल किया था. उसने मुस्लिम धर्म अपना लिया. बीते चार वर्षों से वह मोहम्मद अब्दुल्ला बनकर रहने लगा.

मन्नत पूरा होने पर कबूल लिया था इस्लाम, मरने के बाद दाह संस्कार को लेकर हुआ विवाद
सुरेश तांती ने 2013 में धर्म परिवर्तन के लिए स्थानीय कोर्ट में एफिडेविट दाखिल किया था.

बेगूसराय : बिहार के बेगूसराय में धर्म परिवर्तन को लेकर अनोखा मामला सामना आया है. सुरेश तांती ने मन्नत पूरा होने पर इस्लाम धर्म कबूल कर अपना नाम मोहम्मद अब्दुल्ला रख लिया था. रमजान के दौरान उसने तीन दिनों तक रोजा भी रखा, लेकिन तबियत बिगड़ने लगा तो उसने छोड़ दिया. बुधवार को उसकी मौत हो गई, जिसके बाद उसके अंतिम संस्कार को लेकर परिवार में ही विवाद उत्पन्न हो गया. 

शव को दफनाया जाए या जलाया जाए इस मुद्दे पर लगभग आठ घंटों तक विवाद चलता रहा. विवाद इतना बढ़ गया कि स्थानीय पुलिस को भी इस मामले में दखल देनी पड़ी. बाद में समाज के लोगों ने भी इस मामले में दखल दिया और शव को हिंदू रीति रिवाज के तहत अंतिम संस्कार किया गया.

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बरौनी थाना के निंगा गांव निवासी 70 वर्षीय रेलवे कर्मचारी सुरेश तांती ने 2013 में धर्म परिवर्तन के लिए स्थानीय कोर्ट में एफिडेविट दाखिल किया था. उसने मुस्लिम धर्म अपना लिया. बीते चार वर्षों से वह मोहम्मद अब्दुल्ला बनकर रहने लगा. इस रमजान में उसने तीन दिनों का रोजा भी रखा. 

इस बीच बुधवार को बीमारी के कारण उसकी मौत हो गई. मौत के बाद घर में ही विवाद उत्पन्न हो गया. सुरेश को दफनाया जाए या हिंदू रीति रिवाज से दाह संस्कार किया जाए इस मुद्दे पर विवाद होने लगा. कुछ लोग दफनाने की बात कह रहे थे तो कुछ दाह संस्कार की बात पर अड़े थे. विवाद को देखते हुए एसपी के नेतृत्व में काफी संख्या में पुलिसवाले भी गांव पहुंच गए. लगभग आठ घंटे तक विवाद चलता रहा. बाद में शव को दाह संस्कार के लिए भेजा गया.

मृतक के परिजनों ने बताया कि पैर में जख्म होने के बाद सुरेश ने मन्नत मांगी थी. पूरा हेन पर कोर्ट में एफिडेविट फाइल कर धर्म परिवर्तन कर लिया. अभी चल रहे रमजान के दौरान उसने तीन दिनों का रोजा भी रखा था, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर रोजा छोड़ दिया. 

इस मामले पर एएसपी ने बताया कि मिथिलेश कुमार ने बताया कि सामाजिक स्तर पर पहल कर उसे दाह संस्कार के लिए भेजा गया है. उन्होंने कहा कि घर में ही विवाद था, लेकिन समझा-बुझाकर मामले को सुलझा लिया गया है.