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पुण्यतिथिः मंडल आयोग के अध्यक्ष बीपी मंडल ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण के लिया किया था यह काम

बीपी मंडल की पुण्यतिथि पर आज पटना में एक कार्यक्रम में उन्हें कई राजनीतिज्ञों ने याद कर श्रद्धांजलि दी. 

पुण्यतिथिः मंडल आयोग के अध्यक्ष बीपी मंडल ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण के लिया किया था यह काम
बीपी मंडल आरक्षण के लिए बनाए गए मंडल आयोग के अध्यक्ष थे. (फाइल फोटो)

पटनाः मंडल आयोग की सिफारिश पर सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण दिया गया है. उसी आयोग के अध्यक्ष बीपी मंडल की आज (13 अप्रैल) पुण्यतिथि है. आज पटना में एक कार्यक्रम में उन्हें कई राजनीतिज्ञों ने याद कर श्रद्धांजलि दी. 

बीपी मंडल यानि बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में ही मोरारजी देसाई सरकार ने छह सदस्यीय पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की घोषणा की और तमाम प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद आखिर केन्द्र सरकार ने नौकिरियों पिछड़े वर्गों को 27 फीसदी आऱक्षण देने की अधिसूचना जारी कर दी. आज पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व लोकसभा सांसद रंजन प्रसाद यादव, पाटलिपुत्र से मौजूदा सांसद और केन्द्रीय राज्य मंत्री रामकृपाल यादव, हाल ही में जदयू में शामिल हुए नागमणि और पटना नगर निगम के उप महापौर विनय कुमार पप्पू शामिल हुए. 

रंजन प्रसाद यादव के मुताबिक, बीपी मंडल न सिर्फ एक मुख्यमंत्री थे बल्कि वह एक  सामाजिक वैज्ञानिक भी थे. आज अगर नौकरियों में पिछड़ों को आऱक्षण मिला है तो उसका श्रेय बीपी मंडल को ही जाता है. केन्द्रीय राज्य मंत्री रामकृपाल यादव के ने कहा पिछड़ों की आर्थिक और सामाजिक सुधार का एक बड़ा श्रेय बीपी मंडल को जाता है. उन्होंने काफी तर्क और रिसर्च के बाद जो रिपोर्ट केन्द्र को सौंपी उसी का परिणाम था कि नौकरियों में पिछड़ों को आऱक्षण मिल सका. 

जदयू नेता नागमणि के मुताबिक, कुछ लोगों ने आजादी के बाद दलितों और पिछड़ों के नाम पर खूब सियासत की लेकिन पिछड़ों को सम्मान बीपी मंडल के कारण ही संभव हो सका. पटना नगर निगम के उपमेयर विनय कुमार पप्पू ने बीपी मंडल को महान समाज सुधारक बताया. 

बीपी मंडल मधेपुरा के निवासी थे
बीपी मंडल का जन्म 25 अगस्त 1918 को वाराणसी में हुआ और उनका निधन 13 अप्रैल 1982 को हुआ. वह मधेपुरा के मुरहो गांव के निवासी थे और उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही मौजूद स्कूल कमलेश्वरी मद्य विद्यालय से हुई. 1952 में मधेपुरा विधानसभा से सदस्य चुने गए, 1962 का भी उन्होंने विधानसभा का चुनाव जीता. साथ ही 1967 में मधेपुरा लोकसभा सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे. उन्होंने बिहार के सातवें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी.

मंडल आयोग का गठन 
केन्द्र सरकार ने 20 दिसंबर 1978 को पिछड़े वर्गों की स्थिति की समीक्षा के लिए मोरारजी देसाई सरकार ने बीपी मंडल की अध्यक्षता में छह सदस्यीय पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की घोषणा की थी. 1 जनवरी 1979 में आय़ोग के गठन की अधिसूचना जारी की गई. दो साल के अंदर पूरी रिपोर्ट तैयार की गई. रिपोर्ट तैयार करने से पहले बी पी मंडल ने वास्तविक स्थिति जानने के लिए देश के लगभग सभी जिलों का दौरा किया.

12 दिसंबर 1980 को उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री ज्ञानी जैल सिंह को रिपोर्ट सौंपी थी. इसी साल 31 दिसंबर 1980 को बीपी मंडल ने मौजूदा राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को भी अपनी रिपोर्ट सौंपी. 1982 में मंडल आयोग की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश की गई थी. जनता दल ने 1989 में मंडल आयोग की रिपोर्ट को लोकसभा चुनाव के दौरान घोषणा पत्र का हिस्सा बनाया.

7 अगस्त 1990 को प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने लोकसभा में इस रिपोर्ट को पेश करने की घोषणा की. 13 अगस्त 1990  को मंडल आय़ोग की सिफारिश लागू करने की अधिसचूना जारी की गई. 17 जनवरी 1991 को वीपी सिंह सरकार ने आयोग की सिफारिशें लागू करकने की घोषणा की. कुछ दिक्कतों और विरोध के बाद आखिरकार 8 सितंबर 1993 को केन्द्र सरकार ने नौकरियों में पिछड़े वर्गों को 27 फीसदी आऱक्षण देने की अधिसूचना जारी कर दी गई.