मंगल पांडेय ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने पर सुशील मोदी को दी बधाई, बोले...

सुशील कुमार मोदी को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें दी है. उन्होंने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री का लंबा अनुभव बिहार को आत्मनिर्भर बनाने एवं देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने में फलदायी होगा.

मंगल पांडेय ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने पर सुशील मोदी को दी बधाई, बोले...
सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी है.

पटना: स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बीजेपी (BJP) द्वारा पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी है. उन्होंने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री का लंबा अनुभव बिहार को आत्मनिर्भर बनाने एवं देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने में फलदायी होगा.

आपको बता दें कि 14 दिसंबर को राज्यसभा सीट के लिए चुनाव होना है. 3 दिसंबर से राज्यसभा चुनाव के लिए प्रक्रिया शुरू होगी. सुशील मोदी बिहार की राजनीति में कई दशकों से सक्रिय हैं. पिछले 15 सालों से वो लगातार बिहार के उपमुख्यमंत्री थे और एमएलसी भी हैं. इस बार विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने उन्हें उपमुख्यमंत्री ना बनाकर ताराकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को बनाया है. 

3 दिसंबर तक नामांकन होगा और 4 दिसंबर को स्क्रूटनी की जाएगी. प्रत्याशी सात दिसंबर तक अपनी दावेदारी वापस ले सकते हैं. जरूरत पड़ने पर 14 दिसंबर को मतदान होगा. इसके बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे. वहीं, सुशील मोदी का राज्यसभा में जाना तय माना जा रहा है.

सियासी सफर
सुशील मोदी के सियासत की शुरुआत छात्रसंघ की राजनीति से हुई. 1973 में सुशील मोदी पटना कॉलेज में छात्रसंघ के महामंत्री और लालू यादव (Lalu Yadav) अध्यक्ष बनें. इसके बाद वह बिहार प्रदेश छात्र संघर्ष समिति के सदस्य 1974 में बने. यहीं से वह जय प्रकाश नारायण के आंदोलन जिसे 'जेपी मूवमेंट' या 'संपूर्ण क्रांति आंदोलन' कहा जाता है उससे जुड़ गए. इस दौरान उन्होंने आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. 

90 के दशक में सक्रिय राजनीति में एंट्री
1990 का यह वह साल है जब सुशील मोदी पूर्ण रुप से सक्रिय राजनीति में आ गए. 1990 के विधानसभा चुनाव में पटना सेंट्रल सीट (वर्तमान में कुम्हरार विधानसभा) से सुशील मोदी मैदान में उतरे और जीत हासिल की. इसके बाद वह इस सीट से दो बार चुनाव लड़े और उन्हें दोनों बार जीत हासिल हुई.

बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा
सुशील मोदी आज भी बिहार की राजनीति में प्रासंगिक बने हैं. पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह आज भी कोई सुशील मोदी का किला नहीं ढहा पाया है. सूत्र तो यह भी कहते हैं कि अगर बीजेपी के अंदर थोड़ी सी भी नीतीश कुमार के खिलाफ आवाज उठती है तो सुशील मोदी आगे आकर खड़े हो जाते हैं.