बिहार के कई संस्थानों को मिल रही सोलर एनर्जी से बिजली, बिल का खर्च हुआ आधा

पटना के गांधी मैदान के ठीक सामने स्थित मगध महिला कॉलेज छत के ऊपर करीब 300 की संख्या में सोलर प्लेट लगाए गए थे.  मगध महिला कॉलेज बिहार का पहला ऐसा कॉलेज बना जहां की इमारतें सोलर एनर्जी से रौशन हो रही हैं.

बिहार के कई संस्थानों को मिल रही सोलर एनर्जी से बिजली, बिल का खर्च हुआ आधा
महिला कॉलेज छत के ऊपर करीब 300 की संख्या में सोलर प्लेट लगाए गए थे.

पटना: धीरे-धीरे ही सही बिहार अब प्राकृतिक स्रोतों से उपलब्ध बिजली की ओर बढ़ने लगा है और इसी कड़ी में कई सरकारी कॉलेज, संस्थान और स्कूलों को सौर ऊर्जा से बिजली मिल रही है. कल तक जो संस्थान बिजली के बिल का रोना रोते थे अब उनके बिजली बिल का खर्च पचास फीसदी तक कम हो गया है.

पटना के गांधी मैदान के ठीक सामने स्थित मगध महिला कॉलेज छत के ऊपर करीब 300 की संख्या में सोलर प्लेट लगाए गए थे. इन सोलर प्लेटों के जरिए मगध महिला कॉलेज को पिछले कुछ महीनों से लगातार बिजली मिल रही है और इसके साथ ही मगध महिला कॉलेज बिहार का पहला ऐसा कॉलेज बना जहां की इमारतें सोलर एनर्जी से रौशन हो रही हैं.

सिर्फ मगध महिला कॉलेज ही नहीं बल्कि जेडी वीमेंस कॉलेज, बांकीपुर गर्ल्स स्कूल सहित कई संस्थान जहां सोलर एनर्जी के जरिए बिजली की आपूर्ति हो रही है. मगध महिला कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर शशि शर्मा बताती हैं कि, जिस कॉलेज का बिजली बिल हर महीने करीब 1 लाख 75 हजार हुआ करता था उसका बिल अब 70 से 75 हजार हो गया. 

 

मगध महिला कॉलेज से कुछ दूरी पर मौजूद बांकीपुर गर्ल्स हाई स्कूल में भी अक्टूबर 2019 से सौर ऊर्जा के जरिए बिजली मिल रही है. बांकीपुर गर्ल्स स्कूल के ऊपर सैकड़ों की संख्या में सोलर प्लेट हैं और इसे शाम छह बजे तक सौर ऊर्जा से बिजली मिल रही है. दरअसल शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों में सौर ऊर्जा के जरिए बिजली पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारत किया है.

लक्ष्य है कि कम से कम 5 फीसदी बिजली की आपूर्ति सौर एनर्जी से हो, और अलग-अलग एजेंसी के माध्यम से इस मिशन को पूरा किया जा रहा है. मगध महिला कॉलेज में सूर्यम इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड सौर ऊर्जा के जरिए बिजली दे रहा है तो बांकीपुर गर्ल्स हाई स्कूल में सोडेक्स एजेंसी काम में लगी है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर सोलर एनर्जी के जरिए बिजली पाने के लिए संस्थानों को क्या करना होता है.

सूर्यम इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के एरिया मैनेजर रविशंकर तिवारी के मुताबिक,सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड टेंडर निकालता है और अलग-अलग एजेंसियों के जरिए सरकारी संस्थानों में सौलर एनर्जी के माध्यम से बिजली पहुंचाई जाती है. जिन संस्थानों की पहचान सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड करता है उस संस्थानों को इसके लिए एक पैसे भी खर्च नहीं करने होते हैं. 

संबंधित संस्थानों में 2 या 3 मैगावाट तक की सोलर एनर्जी पैदा करने वाले सोलर प्लेट लगाए जाते हैं.संबंधित संस्थान सूर्यम इंटरनेशनल जैसी एजेंसी को 4 रूपए 59 पैसे प्रति यूनिट की फिक्स रेट से पचीस साल तक के लिए बिजली का बिल चुकाते हैं. यानि भारी भरकम बिल से निजात. 

एक तरफ अगर बिजली बिल प्रतियूनिट सात रूपए हो और ग्राहकों को 4 रूपए 59 पैसे के हिसाब से सोलर एनर्जी का बिल देना पड़ रहा हो तो समझ सकते हैं कि आपका कितने पैसे बचा सकते हैं. इस वक्त बिहार में अलग-अलग सरकारी संस्थानों में सोलर एनर्जी से बिजली पहुंचाई जा रही है. एक नजर बिहार के उन संस्थानों पर जहां सौर ऊर्जा से बिजली मिल रही है.

  • मगध महिला कॉलेज- 100 किलोवाट
  • जेडी विमेंस कॉलेज- 60 किलोवाट
  • बिहार एनीमल साइंस यूनिवर्सिटी- 360 किलोवाट
  • आईसीएआर- 100  किलोवाट
  • संजय गांधी डेयरी इंस्टीट्यूट- 100 किलोवाट
  • आईएचएम ,हाजीपुर- 100 किलोवाट
  • राजेंद्र एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी,पूसा- 605 किलोवाट
  • भारत संचार निगम लिमिटेड- 505 किलोवाट
  • बांकीपुर गर्ल्स हाई स्कूल - करीब 140 किलोवाट

हालांकि सौर ऊर्जा से बिजली पहुंचाने में कुछ दिक्कते भी हैं. दिक्कत ये है कि अगर सोलर पैनल के साथ सोलर इनवर्टर नहीं लगा हो वहां 24 घंटे बिजली के लिए थर्मल पावर पर ही निर्भर रहना होगा. दूसरी ओर घनी ठंड, बरसात और बादल छाने वाले दिनों में सौर ऊर्जा से बिजली पाने में दिक्कत है.