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बिहार का ऐसा अस्पताल जो साल में सिर्फ 2 दिन खुलता, सिर्फ झंडा फहराने आते हैं कर्मचारी

80 के दशक के इस अस्पताल के बारे में ग्रामीणों की मानें तो सिर्फ झंडा फहराने के लिए अस्पताल को खोला जाता है. बाकी दिन अस्पताल में कुते और बकरी घूमते रहते हैं.

बिहार का ऐसा अस्पताल जो साल में सिर्फ 2 दिन खुलता, सिर्फ झंडा फहराने आते हैं कर्मचारी
अरवल का यह अस्पताल साल में सिर्फ 2 ही दिन खुलता है.

संजय, अरवल: बिहार के अरवल (Arwal) में एक ऐसा अस्पताल भी है, जो कि साल में सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन ही खुलता है. कलेर प्रखंड के मसदपुर प्राथमिक केंद्र, जहां डॉक्टरों (Doctor) के तैनाती के बावजूद अस्पताल से डॉक्टर नदारद रहते हैं. यहां तक कि एएनएन भी इस अस्पताल का ताला खोलने नहीं आती है.

80 के दशक के इस अस्पताल के बारे में ग्रामीणों की मानें तो सिर्फ झंडा फहराने के लिए अस्पताल को खोला जाता है. बाकी दिन अस्पताल में कुते और बकरी घूमते रहते हैं. पूरे परिसर में फैली गंदगी इस बात की गवाही दे रही है. स्वच्छता अभियान की रौशनी यहां से कोसों दूर है.

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तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दूबे ने इस अस्पताल का निर्माण करवाया था. पूर्व स्वास्थ्य मंत्री दिलकेश्वर राम ने इसका उद्घाटन किया था. 1988 में बने इस अस्पताल में सोन तटीय इलाके के ग्रामीणों इलाज के लिए आते थे. आज यह स्वास्थ्य केंद्र उपेक्षा का शिकार हो चुका है. जिस समय इसका निर्माण कराया गया था, उस समय लोगों को काफी उम्मीदें थीं. लोगों को अरवल और कलेर इलाज के लिए जाना पड़ता था.

अस्पताल के बाहर लगी 24 घंटे इमरजेंसी सेवा की बोर्ड लोगों को चिढ़ाने का काम कर रही है. सिविल सर्जन ने बताया कि फिलहाल इसमें अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है, लेकिन इसे किस परिस्थिति में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाकर उद्घाटन किया था, इसकी जानकारी विभाग के पास नहीं है. डॉक्टरों का अभाव था. इसके कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. उन्होंने कहा कि एक-दो दिन के अंदर एएनएम की तैनाती कर दी जाएगी और डॉक्टरों की भी नियुक्ति की प्रक्रिया यथासंभव की जाएगी.

-- Pintu Kumar Jha, News Desk