बिहार : बाघों को संरक्षित करने के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में लैंड स्कैप बैठक

वनराज समेत जंगली जीव जंतु को संरक्षित करने के उद्देश्य से इस विशेष बैठक में जानकारियां साझा की गई. 

बिहार : बाघों को संरक्षित करने के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में लैंड स्कैप बैठक
वीटीआर में बैठक.

बगहा : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) और उत्तर प्रदेश के सोहगीबरवा वन आश्रणी क्षेत्र समेत सीमावर्ती करीब आधा दर्जन जिलों के वन अधिकारीयों की बाघों समेत अन्य प्रजाति के जानवरों के संरक्षण और भटके जानवरों को सुरक्षित करने के लिए वीटीआर के सभागार में लैंड स्कैप बैठक हुई.

बिहार के इकलौते टाइगर रिजर्व और उत्तर प्रदेश के सोहगीबरवा वन आश्रणी क्षेत्र, दुधवा नेशनल पार्क और सीमावर्ती मोतिहारी, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, सारण इत्यादि जिलों के वन प्रमंडल वीटीआर से जुड़ा हुआ और खुला क्षेत्र है. ऐसे में वीटीआर में रह रहे बाघ समेत अन्य प्रजाति के जानवर एक जंगल से दूसरे जंगल में जाते हैं. साथ ही जंगल से भटककर रिहायशी इलाकों में चले जाते हैं.

जानवरों को संरक्षित और सुरक्षित करना पहली प्राथमिकता है. वनराज समेत जंगली जीव जंतु को संरक्षित करने के उद्देश्य से इस विशेष बैठक में जानकारियां साझा की गई. वीटीआर में बढ़ते बाघों की संख्या, प्रजनन में इजाफा और रिहायशी इलाकों में प्रवेश सहित जंगल से वन्य प्राणियों के पलायन को कम करने की कोशिश की जाएगी.

बिहार के मुख्य वन संरक्षक एके पांडेय भी इस बैठक में पहंचे. अब देखना होगा कि WWF और VTR प्रबंधन की ओर से जंगली जानवरों की सुरक्षा की यह कोशिश कितनी कारगर सिद्ध होती है. बीते कुछ वर्षों में बाघों को लगातार वन तस्करों और शिकारियों ने अपना निशाना बनाया. नरसिंह गुरो और हरी गुरो जैसे दुर्दांत वन अपराधियों ने करीब दर्जन भर बाघों को मार डाला है.

मौजूदा समय में वन विभाग ने तस्करी और वन अपराधियों पर रोकथाम जरूर लगाया है. दूसरी तरफ बाघों की संख्या में लगातार इजाफा होकर आज करीब चालीस का आंकड़ा पार कर गया है. लगातार बाघों कि संख्या में हो रही बढ़ोतरी से वन विभाग और अधिकारी इस मुहीम को गति प्रदान करने में जुटे हैं.