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झारखंड के RINPAS में अब नहीं दिखा सकेंगे बिहार के मानसिक रोगी, पैसों को लेकर राज्यों में अनबन

 झारखंड सरकार ने बिहार सरकार से बिहार के रोगियों के रिनपास में इलाज पर हुई है खर्च की राशि मांग की थी. लेकिन बिहार सरकार ने राशि देने के बजाय रिनपास प्रबंधन को एक पत्र भेजा है जिसमें स्पष्ट कहा है कि बिहार सरकार की अनुमति लिए वगैर भविष्य में बिहार के किसी भी मानसिक रोगी को भर्ती ना कराए जाए.

झारखंड के RINPAS में अब नहीं दिखा सकेंगे बिहार के मानसिक रोगी, पैसों को लेकर राज्यों में अनबन
बिहार के कोइलवर में भी 180 बेड का मानसिक रोग अस्पताल खुल गया है.

मनीष गुप्ता, रांचीबिहार सरकार के एक पत्र ने राज्य के मानसिक रोगियों की परेशानी बढ़ा दी है.बिहार से इलाज के लिए रांची की रिनपास पहुंचने वाले मानसिक रोगियों की भर्ती पर फिलहाल रोक लगा दी गई है.

दरअसल मामला ये है कि झारखंड सरकार ने बिहार सरकार से बिहार के रोगियों के रिनपास में इलाज पर हुई है खर्च की राशि मांग की थी. लेकिन बिहार सरकार ने राशि देने के बजाय रिनपास प्रबंधन को एक पत्र भेजा है जिसमें स्पष्ट कहा है कि बिहार सरकार की अनुमति लिए वगैर भविष्य में बिहार के किसी भी मानसिक रोगी को भर्ती ना कराए जाए.
 

इसका कारण यह है कि बिहार सरकार के कोइलवर में 180 बेड का मानसिक रोग अस्पताल खुल गया है. वह सरकार के पत्र के बाद रिनपास के बिहार के रोगियों की भर्ती का इलाज करने पर रोक लगा दी गई है. रिनपास यानी रांची इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरो साइकेट्रि एंप्लॉय साइंस मैं प्रति मरीज 900 प्रतिदिन का शुल्क लगता है और दूसरी ओर 2011 में बिहार सरकार ने इसे लेकर झारखंड सरकार को पैसे भी दिए.

लेकिन 2011 के बाद बिहार के मरिजों के इलाज में होने वाले खर्च का भुगतान करने में बिहार सरकार का स्वास्थ विभाग टालमटोल करता रहा. रिनपास निदेशक का कहना है कि अब तक मैनेजमेंट कमिटी से यह पारित था कि आउट ऑफ स्टेट पेशेंट से 900 प्रतिदिन चार्ज करना था और बिहार के यहां 50 फीसदी मरीज रहते हैं. इनका पैसा हम लोग लेते हैं जो लगभग 76 करोड़ के आसपास है.

उन्होंने कहा कि जब हम लोगों ने बिहार सरकार को चिट्ठी लिखा तो उधर से जवाब आया कि अब जितना भी पेशेंट बिहार से आ रहे हैं अगर रिनपास में भर्ती करते हैं तो उनकी जिम्मेदारी बिहार गवर्नमेंट नहीं लेगी क्यों हम लोग खर्च में हुए पैसे का डिमांड भेजते हैं तो वो नहीं देंगे और जो पुराना पैसा बचा हुआ है उस पर सरकार विचार कर रही है. इस लिए बिहार के मानसिक मरीजों का भर्ती तो अभी बंद कर दिया गया है.

दो राज्यो के बीच पत्राचार में मरीजों की समस्या बढ़ गई है. इन मानसिक रोगियों का क्या होगा जो बिहार से इस उमीद पर आते हैं कि हम यहां पर ठीक हो कर अपने घर जाएंगे.