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कोडरमा: बंद के बावजूद माइका खदान कारोबार में इजाफा, लगातार बढ़ रहा डिमांड

भारत के साथ-साथ पूरे विश्व में माइका की डिमांड दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है. इलेक्ट्रॉनिक इक्यूपमेंट के अलावा कुछ ऐसे उत्पाद हैं, जिनके निर्माण में सिर्फ माइका का ही इस्तेमाल किया जा सकता है. 

कोडरमा: बंद के बावजूद माइका खदान कारोबार में इजाफा, लगातार बढ़ रहा डिमांड
कोडरमा में माइका खनन का काम लगातार बढ़ रहा है.

कोडरमा: वन संरक्षण कानून लागू होने के बाद कोडरमा (Koderma) में सभी माइका खदानें बंद कर दी गई. बावजूद इसके लगातार माइका का कारोबार फलता फूलता जा रहा है. आपको जानकर हैरानी होगी कि न तो बाजार में माइका की डिमांड कम हुई है और न ही बाजार बंद हुआ है.

एक समय था जब कोडरमा में माइका (Mica Mining) की सैकड़ों खदानें हुआ करती थी. इन खदानों से सैकड़ों टन माइका हर रोज़ निकाला जाता था. इन्हीं वजहों से कोडरमा को माइका नगरी भी कहा जाता है. लेकिन, 1980 में फॉरेस्ट एक्ट के आने के बाद सभी खदानें बंद हो गईं, मगर माइका का कारोबार आज भी फल-फूल रहा है.

आंकड़ों के मुताबिक माइका के कारोबार में लगातार इजाफा हो रहा है. तकरीबन हर साल 350 से 500 करोड़ का व्यापार आज भी माइका के ज़रिए किया जा रहा है. लेकिन इसका फायदा सरकार को नहीं मिल रहा. बहरहाल, कह सकते हैं कि मायका खदानों के बाहर या अंदर आज भी बड़े पैमाने पर मायका का अवैध उत्खनन जारी है.

भारत के साथ-साथ पूरे विश्व में माइका की डिमांड दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है. इलेक्ट्रॉनिक इक्यूपमेंट के अलावा कुछ ऐसे उत्पाद हैं, जिनके निर्माण में सिर्फ माइका का ही इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा अब तक किसी देश में माइका का दूसरा विकल्प भी तैयार नहीं किया जा सका है. ऐसे में खदानों के बंद होने के बाद वैध रूप से न सही, अवैध रूप से ही मायका का कारोबार जारी है.

माइका की बढ़ती डिमांड को देखते हुए बंद पड़े माइका खदानों के बाहर कचरे को सरकार ने डंप के रूप में चिन्हित कर नीलामी जरूर करवाई, लेकिन इस नीलामी में खामियों का फायदा उठाकर आज भी माफिया माइका का अवैध कारोबार कर रहे हैं. कारोबारियों का कहना है कि सरकार ने कचरे की नीलामी तो की लेकिन इसका फायदा सरकार को न मिलकर माफियाओं को मिल रहा है.

जब खदानों से बड़े-बड़े माइका के टुकड़े निकला करते थे, उस वक्त माइका के छोटे आकार जिसे आज ढिबरा कहते हैं, उसे खदानों के बाहर या आसपास के इलाकों में कचरा समझकर फिकवा दिया जाता था. आज उसी की कीमत बाजार में करोड़ों की है. फिलहाल माइका का ये कचरा माफियाओं के लिए कुबेर साबित हो रहा है.

-- Jyoti, News Desk