रोजगार मिलना तो दूर कर्ज में डूबे प्रवासी श्रमिक, वापस काम पर लौटना बनी मजबूरी

कोरोना का संक्रमण जिस तेजी से राज्य में बढ़ रहा है. कोरोना के डर से वापस आये कामगार उसी रफ्तार से महानगरों का रुख करने लगे हैं. अपने इलाके में काम नहीं मिलने की वजह से रोजी-रोटी की समस्या हुई, तो महामारी के बीच में ही उन्होंने वापसी की राह पकड़ ली.

रोजगार मिलना तो दूर कर्ज में डूबे प्रवासी श्रमिक, वापस काम पर लौटना बनी मजबूरी
प्रवासी श्रमिक अब वापस अपने काम पर लौटने लगे हैं.

पटना: कोरोना का संक्रमण (Coronavirus) तेजी से राज्य में बढ़ रहा है. लेकिन, कोरोना के डर से वापस आए प्रवासी श्रमिक रफ्तार से महानगरों का रुख करने लगे हैं. अपने इलाके में काम नहीं मिलने की वजह से रोजी-रोटी की समस्या हुई, तो महामारी के बीच में ही उन्होंने वापसी की राह पकड़ ली. रेलवे स्टेशन से लेकर एयरपोर्ट तक वापस जानेवाले प्रवासी श्रमिकों के वापस जाने की कतार लग गई है.

वेटिंग हॉल में जगह नहीं
पटना जंक्शन के वेटिंग हॉल के हालात ये है कि यहां एक सौ से ज्यादा लोग ट्रेन आने का इंतजार करते देखे जाते हैं. इनमें ज्यदातर ऐसे हैं, जो काम के सिलसिले में बाहर जा रहे हैं. पटना एयरपोर्ट पर भी सैकड़ों की संख्या में कामगार इकट्ठा हैं. इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो लॉकडाउन से पहले जिस कंपनी में काम करते थे, उन्हें बुलाया है. उन्हें गांव से गाड़ी से एयरपोर्ट बुलाया और हवाई जहाज के जरिये वापस बुला रही है. एयरपोर्ट के आसपास कंपनियों के सुपरवाइजर सक्रिय हैं, जो मजदूरों के जाने की व्यवस्था कर रहे हैं.

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दिल्ली के आनंद विहार में श्रमिकों की भीड़
यहां तक कि दिल्ली के आनंद विहार बस स्टैंड पर बने रैपिड टेस्टिंग सेंटर पर भारी संख्या में बिहार के मजदूर अपना कोरोना टेस्ट के लिए कतार में खड़े मिले. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वो वापस दिल्ली वापसी क्यों करने को मजबूर हैं. इनका कहना है कि बिहार में कोई रोजगार नहीं है. किसी तरीके की नौकरी नहीं है तो पेट कैसे भरा जाएगा. इसके साथ ही कोरोनावायरस और बाढ़ पूरे बिहार को अपने चपेट में ले चुका है जिसकी वजह से राशन पानी भी घर तक नहीं पहुंच पा रहा है.

बाढ़ के बीच दरभंगा से लौट रहे वापस
दरभंगा से वापस लौट रहे प्रवासी मजदूरों ने यहां तक कहा है कि लोगों मे कहा 6 हजार रुपये नहीं रोजगार चाहिये, पूरा ट्रेन भर कर जा रहा है क्या करें पेट अपना और परिवार का पालन है. कौन बाहर परिवार छोड़ 16 16 घण्टे खटना चाहता हैं अगर बिहार में काम मिले तो यही परिवार के साथ रह जाएंगे,नीतीश कुमार को सोचना चाहिये, बाहर जाना कोई नही चाहता ,सभी के दिल जल रहे है सभी दिल जला कर बाहर जा रहे है परिवार का पेट पालन है.

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बक्सर में भी लोग बेहाल
बक्सर जिले में हरियाणा, गुजरात और पंजाब के अलावे कई शहरों से काम छोड़ कर वापस लौटे मजदूर एक बार फिर से वापस लौट रहे हैं. रोजगार के अभाव के कारण इन मजदूरों के सामने रोजी रोटी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है. बक्सर जिला मुख्यालय से सटे जगदीशपुर पंचायत के जगदीशपुर गांव के रहने वाले फिरोज रवि और राकेश कुमार ने कहा कि वो दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में काम करते थे लेकिन कोरोना के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा.

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मुजफ्फरपुर से भी कर रहे पलायन
मुजफ्फरपुर के भी कई प्रवासी श्रमिक अब वापस अपने काम पर लौटने लगे हैं. रोजगार के दूर-दूर तक कोई आसार नहीं नजर आने के बाद वो अब वापस दूसरों राज्य की ओर पलायन कर रहे हैं. कई मजदूरों ने यहां तक कहा कि वो अब कर्ज की वजह से वापस दिल्ली मुम्बई यानी दूसरे प्रदेशों में जाने को मजबूर हो गए हैं. शुरुआत में जो लोग पैदल और अन्य साधनों से कोरोना के कारण वापस आए थे वह कुछ महीनों में ही बेरोजगारी की मार झेलते हुए कर्ज में डूब गए और अब वापस लौट रहे हैं.