मुंगेर: जीविका से जुड़कर खुश हैं प्रवासी मजदूर, कहा-रोजगार मिलेगा तो नहीं जाएंगे बाहर

 प्रवासियों ने कहा कि, बिहार सरकार हमें गांव या शहर में रोजगार देती है तो, हम दूसरे राज्य क्यों जाएंगे. इसलिए हम बिहार सरकार से मांग करते हैं कि, हमें अब यहीं रोजगार दिया जाए.

मुंगेर: जीविका से जुड़कर खुश हैं प्रवासी मजदूर, कहा-रोजगार मिलेगा तो नहीं जाएंगे बाहर
सस्ते दर पर मास्क (Mask) का निर्माण कर लोगों को उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

प्रशांत कुमार/मुंगेर: रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरे प्रदेशों में रह रहे प्रवासी मजदूर, अब वैश्विक महमारी के कारण अपने घर आ गए हैं. वहीं, इन प्रवासी मजदूरों का 14 दिन क्वारेंटाइन सेंटर में बिताने के बाद, उन्हें अपने जिले में रोजगार की चिंता सताने लगी है. इनको देख बिहार सरकार ने सभी प्रवासी मजदूरों को उनके स्किल के मुताबिक काम दिया जाए, इसका निर्देश सभी जिला प्रशासन को दिया है.

इसी कड़ी में, राज्य सरकार द्वारा जीविका के माध्यम इन प्रवासी मजदूरों को जोड़कर, सस्ते दर पर मास्क (Mask) का निर्माण कर लोगों को उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है. इसी क्रम में संग्रामपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित सर्वश्रेष्ठ जीविका महिला संकुल संघ के द्वारा कार्य प्रारंभ किया जा चुका है.

इस कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रखंड परियोजना प्रबंधक निहारिका राज ने कहा कि, प्रवासी मजदूरों के लिए काम उपलब्ध कराकर उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना सरकार की पहली प्राथमिकता है. सरकार द्वारा सस्ते दर पर मास्क की उपलब्धता सुनिश्चित कराने एवं प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, सरकार द्वारा लिए गए निर्णय को मूर्त रूप देते हुए दर्जी के कार्य से जुड़ें.

उन्होंने कहा कि, 10 प्रवासी मजदूरों का चयन कर सर्वश्रेष्ठ जीविका कार्यालय में मास्क निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया है.  जिले के इस प्रखंड के इलाके में 26 प्रवासी मजदूर मिले थे, जिसमें से 17 लोगों का चयन किया गया है. इनमें से सात व्यक्ति कपड़ा धोने व आयरन के कार्य से जुड़े थे, जिन्हें यही काम यहां दिया गया है.

वहीं, 10 मजदूरों को मास्क बनाने का काम में लगाया गया है. इन प्रवासी मजदूरों को एक मास्क के निर्माण पर 5 रुपए दिए जा रहे हैं. साथ ही, इन प्रवासी मजदूरों को सुरक्षा के लिए चेहरे पर मास्क और सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई है. उन्होंने कहा कि, इससे इनकी आमदनी बढ़ेगी और सरकार की योजना भी सफल होगी.

उन्होंने कहा कि, आगे और भी मजदूरों को विभिन्न कार्यों से जोड़ें जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वहीं, प्रवासी मजदूरों ने कहा कि, वो कई सालों से बंगलौर में रह कर प्राइवेट कंपनी में कपड़े सिलाई का काम करते थे. वैश्विक महमारी के कारण लगे लॉकडाउन (Lockdown) में कंपनी बंद हो गई और हम लोगों को खाने-पीने की समस्या उत्पन्न के साथ मकान मालिक किराए के लिए मांग करने लगे.

उन्होंने कहा कि, जब केंद्र सरकार ने लॉकडाउन में फंसे दूसरे राज्यों को अपने-अपने राज्य भेजने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई तो हमलोग ट्रेन के माध्यम से मुंगेर आए, जिसके बाद हम लोग 14 दिन अपने प्रखंड के क्वारेंटाइन सेंटर में रहे. इसके बाद, जिला प्रशासन व राज्य सरकार के निर्देश पर हमें जीविका के माध्यम से मास्क बनाने का रोजगार मिला.

प्रवासियों ने कहा कि, हमलोग 50-60 मास्क प्रति दिन बना लेते हैं. उन्होंने कहा कि, तत्काल हम इस रोजगार से खुश है और दो पैसे की आमदनी हो रही है. हमलोग चाहते हैं कि बिहार सरकार हमे गांव या शहर में रोजगार देती है तो, हम दूसरे राज्य क्यों जाएंगे. इसलिए हम बिहार सरकार से मांग करते हैं कि, हम सभी प्रवासी मजदूरों को अब यहीं रोजगार दे.

बता दे कि, लॉकडाउन के कारण बाहरी राज्यों में फंसे लगभग 11 हजार प्रवासी मजदूर हाल के दिनों में जिले में वापस लौट चुके हैं. इन्हें जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए विभिन्न क्वारेंटाइन कैंपों में भर्ती कराया गया है. वहीं, इन 11 हजार प्रवासी मजदूरों में 70 प्रतिशत अकुशल मजदूर हैं. जबकि 30 प्रतिशत कुशल मजदूर हैं. इसमें- दर्जी, ड्राइवर, राजमिस्त्री, हेल्पर, सिलाई, पेंटर हैं.

इधर, वर्तमान में विभिन्न क्वारेंटाइन कैंपों में लगभग 4 हजार प्रवासी मजदूरों को 14 दिनों का क्वारेंटाइन पीरियड पूरा करने के बाद, 7 दिनों के होम क्वारेंटाइन के लिए घर भेज दिया गया है. जबकि, 7 हजार प्रवासी मजदूर विभिन्न क्वारेंटाइन कैंपों में भर्ती हैं.

वहीं, जिला प्रशासन द्वारा इन प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए स्किल मैपिंग कराया गया है. इसमें इच्छुक लगभग 1,364 अकुशल प्रवासी मजदूरों में से 1,036 प्रवासी मजदूरों का जॉब कार्ड अब तक जिला प्रशासन द्वारा बनाया जा चुका है.

इसमें से 176 अकुशल प्रवासी मजदूरों को 14 दिनों को क्वारेंटाइन पीरियड और 7 दिनों को होम क्वारेंटाइन समय पूरा करने के बाद, विभिन्न योजनाओं में कार्य के लिए लगाया गया है. जिसमें से इन 176 अकुशल मजदूरों को मनरेगा (MNREGA), जल जीवन हरियाली, मुख्यमंत्री सात निश्यच योजना के हर घर नल का जल और हर घर पक्की गली-नाली योजना में लगाया गया है.