झारखंड: कोरोना काल में MNREGA बना प्रवासियों की आय का सहारा, श्रमिकों ने जताई खुशी

आंध्र प्रदेश से लौटे प्रवासी मजदूर ने कहा कि, लॉकडाउन में सब जगह काम बंद था. ऐसे में घर का खर्च चलाने के लिए अपने ही गांव में मनरेगा योजना से जुड़ गया.

झारखंड: कोरोना काल में MNREGA बना प्रवासियों की आय का सहारा, श्रमिकों ने जताई खुशी
मनरेगा (MNREGA) लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है.j

रांची: कोरोना (Corona) संक्रमण के कारण झारखंड में भी लॉकडाउन (Lockdown) जारी है. बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर झारखंड लौटे हैं, तो यहां रह रहे श्रमिकों के सामने भी काम की समस्या थी. ऐसे में, मनरेगा (MNREGA) लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है.
 
दरअसल, राजधानी रांची से लगभग 100 किलोमीटर दूर खूंटी जिले में एक गांव है मरचा. ये पूरा इलाका घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में आता है. लेकिन यहां भी मनरेगा के तहत लोगों को गांव में ही राज्य सरकार काम दे रही है. इस पंचायत में भी बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर (Migrant Labours) लौटे हैं.

आंध्र प्रदेश से लौटे प्रवासी मजदूर ने कहा कि, वह आंध्र प्रदेश में राइस मिल में काम करता था. लेकिन लॉकडाउन के कारण आना पड़ा. लॉकडाउन में सब जगह काम बंद था. ऐसे में घर का खर्च चलाने के लिए अपने ही गांव में मनरेगा योजना से जुड़ गया. लगभग एक महीने से ज्यादा समय से इसे गांव में ही काम मिल रहा है.

वहीं, मुंबई से लौटे सतेंद्र ने कहा कि, उनका होम क्वारेंटाइन पूरा हो चुका है. मुम्बई में वह कारपेंटर का काम करता था, लेकिन अब अपने गांव में ही मनरेगा से जुड़ने की योजना बना रहा है. सतेंद्र का कहना है कि, अभी जबकि कहीं काम नहीं मिल रहा है, ऐसे में मनरेगा से जुड़कर काम करेगा.

हालांकि, सतेंद्र का मानना है कि, मनरेगा में झारखंड में लोगों को कम मजदूरी मिलती है. कम मजदूरी को लेकर इसके परिवार के लोगों को थोड़ी नाराजगी भी है. वहीं, बैंगलोर से लौटे प्रवासी मजदूर ने कहा कि, वह वहां पर प्लम्बर का काम करता था. लॉकडाउन में उसने भी अपने गांव में मनरेगा से जुड़ना ही बेहतर समझा और जब से लॉकडाउन है, वह मनरेगा में ही काम कर रहा है.