झारखंड: दामोदर नदी के किनारे हथिया पत्थर की मान्यताएं, पूजा से पूरी होती हैं मनोकामनाएं

बोकारो के दामोदर नदी के किनारे ये हथिया पत्थर है जो देखने मे बिल्कुल हाथी के आकार जितना विशाल है बल्कि और भी बड़ा ही है. देखने वाले कहते हैं कि कोई हाथी के आकार की चीज दामोदर नदी के तट पर बैठा हुआ है. 

झारखंड: दामोदर नदी के किनारे हथिया पत्थर की मान्यताएं, पूजा से पूरी होती हैं मनोकामनाएं

धनबाद: झारखंड के बोकारो में मकर संक्रांति के मौके पर मंगलवार सुबह से ही लोगों की भीड़ दामोदर नदी के तट पर देखी जा रही है. मन्दिरों में पूजा अर्चना करने के साथ-साथ एक हाथीनुमा पत्थर की भी पूजा की जा रही है. लोग उस विशालकाय पत्थर की भी पूजा कर रहे हैं जिसे हथिया पत्थर के नाम से जाना जाता है. इस मौके पर यहां मेले का आयोजन भी किया जाता है.

बोकारो के दामोदर नदी के किनारे ये हथिया पत्थर है जो देखने मे बिल्कुल हाथी के आकार जितना विशाल है बल्कि और भी बड़ा ही है. देखने वाले कहते हैं कि कोई हाथी के आकार की चीज दामोदर नदी के तट पर बैठा हुआ है. यहां ऐसी मान्यता है कि जो भी इस हथिया पत्थर से मकर संक्रांति के दिन पूजा-अर्चना कर कुछ मांग करता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है. इस बात को जानने और सुनने वाले लोग दूर-दूर से यहां अपनी मनोकामना ले कर आते हैं. यह परंम्परा सौ सालों से चली आ रही है.

वहां के पुजारी ने बताया कि एक बार एक राजा बारात लेकर इसी दामोदर नदी को पार करने के लिए आय जब नदी ऊफान पर थी. राजा ने नदी के पास जा कर विनती करते हुए कहा कि अगर बाराती अगर सकुशल वापस लौट आएंगे तो वे इस नदी मे पूजा पाठ करके भोग चढ़ाया करेंगे. इसके साथ ही बकरे की बली भी दी जाएगी. इसके बाद नदी में आया ऊफान कम हो गया. राजा अपने बारातियों के साथ नदी पार कर गए. लेकिन जब राजा नदी पार कर गए तो उन्होंने यह कहा कि जब वे नदी पार कर गए तब कैसी पूजा. इसके बाद नदी के तट पर ही राजा पत्थर के बन गए. 

यहीं नहीं राजा के साथ बारात में शामिल सभी बाराती हाथी-घोड़े समेत पत्थर के बन गए. वह बड़ा पत्थर राजा के बारातियों में शामिल उसी हाथी की बताई जाती है. दामोदर नदी के तट पर उसी हथिया पत्थर की पूजा-अर्चना होती है.