बिहार में एनडीए और महागठबंधन दोनों में है सीटों पर उम्मीदवारी का पेंच

बिहार में सीटों को लेकर एनडीए हो या महागठबंधन दोनों में उम्मीदवारों को लेकर पेंच फंसा हुआ है. 

बिहार में एनडीए और महागठबंधन दोनों में है सीटों पर उम्मीदवारी का पेंच
एनडीए और महागठबंधन में सीटों को लेकर पेंच सुलक्ष नहीं रहा है. (फाइल फोटो)

नई दिल्लीः चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करने जा रही है. रविवार शाम को चुनाव आयोग तारीखों का ऐलान करेगी. जिसके बाद पूरे देश में अचार संहिता लागू हो जाएगा. वहीं, बिहार में सीटों को लेकर एनडीए हो या महागठबंधन दोनों में उम्मीदवारों को लेकर पेंच फंसा हुआ है. एनडीए ने तो दलगत सीटों की संख्या तय कर दी है, लेकिन महागठबंधन में की रूप रेखा कैसी होगी यह भी पता नहीं चल पाया है. ऐसे में साफ है कि दोनों गठबंधनों में उम्मीदवारी को लेकर पेंच कुछ ज्यादा ही फंसा है.

सीटों के बंटवारे के बाद भी एनडीए ने अभी तक किस दल कि किस सीट पर उम्मीदवारी होगी यह तक नहीं ऐलान नहीं कर पा रहा है. वहीं, महागठबंधन में सहयोगी दलों को यह भी नहीं पता है कि उनके खाते में कितनी और कौन सी सीट आएगी. हालांकि सभी नेता अपने गठबंधन को लेकर सब ठीक होने की बात कर रहे हैं.

दलों के कार्यकर्ताओं की भी बेचैनी बढ़ी है लेकिन उन्हें आश्वासन दे रहे हैं कि एक या दो दिन में ऐलान हो जाएगा. हालांकि महागठबंधन के दलों में कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेता भी अब अधेड़ हो रहे हैं. क्यों कि उन्हें यह भी पता नहीं है कि उनके पास कितनी सीटें होंगी.

जेडीयू नेता राजीव रंजन ने सीटों पर दलों की उम्मीदवारी को लेकर कहा है कि एक दो दिन में इसकी औपचारिक घोषणा हो जाएगी. साथ ही उन्होंने कहा कि एनडीए के तीनों दलों को पता है कि उन्हें कहां से चुनाव लड़ना है. सभी नेताओं को सीटों के बारे में जानकारी है. यहां केवल आधिकारिक घोषणा होना बांकि है.

वहीं, आरजेडी नेता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि महागठबंधन में सब ठीक चल रहा है लेकिन सीटों के बंटवारे से लेकर सीटों के दलीय उम्मीदवार के प्रश्न पर वह एनडीए पर निशाना साधने लगते हैं. उनका कहना है कि एनडीए ने भी अब तक घोषणा नहीं की है.

कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा से भी सवाल करने पर कुछ ऐसा ही जवाब मिला. महागठबंधन में सब तय हो गया है. एनडीए को बताना चाहिए कौन किस सीट पर लड़ेगा. साफ है कि कोई अपने पत्ते खोलना नहीं चाहता है.

एनडीए में भी कई सीटों पर पेंच बुरी तरह से फंसा हुआ है. जिसकी वजह से दलों की उम्मीदवारी पर फैसला नहीं हो पा रहा है. वहीं, महागठबंधन में यह भी तय नहीं हो पाया है कि इसकी सहयोगी दलों में कौन-कौन शामिल हैं. ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि महागठबंधन अंत में अलग ही मोड़ लेगा. जिसमें कई दल अकेले भी चुनाव लड़ सकते हैं.