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क्या आरजेडी की 'MY' समीकरण में एनडीए ने कर दी है सेंधमारी?

लोकसभा चुनाव 2019 परिणाम से यह साबित हो रहा है कि बिहार में कहीं न कहीं 'MY' समीकरण के वोट में बिखराव हुआ है. एनडीए ने आरजेडी के इस वोट बैंक में सेंधमारी की है.

क्या आरजेडी की 'MY' समीकरण में एनडीए ने कर दी है सेंधमारी?
आरजेडी की 'MY' समीकरण में एनडीए ने कर दी है सेंधमारी. (फाइल फोटो)

पटनाः लोकसभा चुनाव 2019 परिणाम से यह साबित हो रहा है कि बिहार में कहीं न कहीं 'MY' समीकरण के वोट में बिखराव हुआ है. एनडीए ने आरजेडी के इस वोट बैंक में सेंधमारी की है. बिहार सरकार में मंत्री और जेडीयू नेता जयकुमार सिंह के मुताबिक लोगों का मिज़ाज बदला है इसलिए 'MY' समीकरण में बिखराव हुआ है.

उन्होंने कहा कि इस चुनाव में M भी बदला और Y भी बदला है. डेहरी विधानसभा उपचुनाव में जीतकर आए बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायक सत्यनारायण यादव ने दावा किया कि डेहरी विधानसभा के सभी जातियों का वोट इन्हें मिला है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम बाहुल्य बुथ पर इन्हें वोट मिला है.

दूसरी तरफ आरजेडी यह दावा कर रही है कि हमारे वोटर एकजुट हैं. आरजेडी विधायक भाई विरेन्द्र ने कहा कि कुछ अपवाद को छोड़ दिया जाए तो 'MY' समीकरण पूरी तरह से एकजुट है और आरजेडी के साथ है. वो बिखराव की बात को इनकार कर रहे हैं.  

2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि आरजेडी अपने 'MY' समीकरण को एकजुट नहीं रख पाई. 243 विधानसभा क्षेत्रों पर 225 विधानसभा सीटों पर एनडीए आगे रही. यही नहीं पहली बार किसी गठबंधन को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिला. इससे पहले 2004 लोकसभा चुनाव में यूपीए को 45 प्रतिशत वोट मिले थे. तब यूपीए ने 29 सीटें जीती थी और सबसे अधिक 22 सीटें आरजेडी को मिली थी.

एनडीए को 2004 के चुनाव में 36.93, 2009 के चुनाव में 38.03, 2014 चुनाव में 38.80 प्रतिशत वोट मिले थे. जबकि इस बार 2019 के चुनाव में 52 फीसदी वोट पर एनडीए को 39 सीटें मिली है. यही नहीं 'MY' समीकरण वोट के बिखराव का असर कई सीटों पर दिखने को मिला. अगर 'MY' समीकरण में सेंध नहीं लगती तो पाटलिपुत्र, मधेपुरा, सुपौल, उजियारपुर सीटें एनडीए उम्मीदवारों के लिए जीतना आसान नहीं होता.

इसके अलावा झंझारपुर, अररिया, बेगूसराय, सीवान, दरभंगा, मधुबनी पर भी जीत का अंतर इतना नहीं हो पाता. कुछ ही विधानसभा सीट जैसे बयासी, राघोपुर, मनेर, मसौढ़ी, पालीगंज, जहानाबाद, मखदुमपुर, जोकीहाट, अररिया, किशनगंज, अमौर पर महागठबंधन के प्रत्याशी को बढत मिली. 2020 में बिहार विधान सभा का चुनाव है. महागठबंधन को अपनी रणनीति में परिवर्तन करना पड़ेगा. ख़ासकर 'MY' समीकरण कैसे एकजुट रहे इसको लेकर मंथन करना पड़ेगा.