PM मोदी से CM नीतीश ने की नेपाल की शिकायत, बोले-पड़ोसी मुल्क नहीं कर रहा सहयोग

सीएम ने कहा कि, इस वर्ष भी मधेपुरा जिले में पहले से बने हुए बांध की मरम्मती और मधुबनी में नो मैन्स लैंड में बने बांध की मरम्मती कार्य में नेपाल सरकार द्वारा सहयोग नहीं किया गया.

PM मोदी से CM नीतीश ने की नेपाल की शिकायत, बोले-पड़ोसी मुल्क नहीं कर रहा सहयोग
बाढ़ को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी के साथ हुई सीएम नीतीश कुमार की बैठक हुई. (फाइल फोटो)

पटना: बाढ़ (Flood) को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के साथ हुई बैठक में, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने नेपाल के असहयोग का मुद्दा उठाया. मुख्यमंत्री ने कहा कि, इस बार कई जिलों में बाढ़ निरोधी कामों को नेपाल की ओर से रोका गया, जिससे मई में पूरे होनेवाले काम जून के अंत तक पूरे किए जा सके. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ प्रभावित छह राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक की.

सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि, बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए इस बैठक के आयोजन के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूं. 2017 में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए बिहार में प्रधानमंत्री का आगमन हुआ था और उस दौरान भी पूर्णिया में बाढ़ के संबंध में प्रधानमंत्री के साथ विस्तृत चर्चा हुई थी. उत्तर बिहार बाढ़ से अभी पूरी तरह प्रभावित है. राज्य में सितंबर माह तक बाढ़ की आशंका बनी हुई रहती है.

16 जिले बाढ़ प्रभावित
मुख्यमंत्री ने कहा कि, अभी राज्य के 16 जिलों के 125 प्रखंडों के 2232 पंचायतों की 74 लाख 20 हजार से ज्यादा की जनसंख्या बाढ़ से प्रभावित है. राहत और बचाव के लिए सभी जरुरी कदम उठाए जा रहे हैं. एनडीआरएफ (NDRF) की 23 और एसडीआरएफ (SDRF) की 17 टीमें लगातार काम कर रही हैं. 5 लाख 8 हजार लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाके से निकाला गया है.

राहत शिविर में रह रहे 29 हजार लोग
उन्होंने कहा कि, 29 राहत शिविरों में 27 हजार लोग रह रहे हैं. सामुदायिक रसोई केंद्र भी चलाए जा रहे हैं. जिसकी व्यवस्थाओं का मैंने खुद जाकर जायजा लिया है. राहत शिविरों में रह रहे लोगों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का पालन कराया जा रहा है और उनकी कोरोना (Corona) संक्रमण की जांच भी कराई जा रही है. 1267 सामुदायिक रसोई केंद्रों पर प्रतिदिन साढ़े 9 लाख से अधिक लोग भोजन कर रहे हैं. उनकी भी कोरोना संक्रमण की जांच कराई जा रही है.

बाढ़ को लेकर सभी विभाग पूरी तरह अलर्ट
सीएम ने कहा कि, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का मैंने एरियल सर्वे किया है और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं. भविष्य में भी बाढ़ की आशंका बनी हुई है, उससे निपटने के लिए जरूरी तैयारी करने को कहा गया है. सभी विभाग पूरी तरह से अलर्ट हैं.  

नेपाल द्वारा नहीं किया जा रहा सहयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि, नेपाल में ज्यादा वर्षापात के कारण उत्तर बिहार बाढ़ से प्रभावित होता है. भारत-नेपाल समझौते के आधार पर बिहार का जल संसाधन विभाग सीमावर्ती इलाके में बाढ़ प्रबंधन का कार्य करता है. हाल के वर्षों में नेपाल सरकार द्वारा पूरा सहयोग नहीं किया जा रहा है.  2008 में कोसी त्रासदी के समय भी बांध टूटने से बिहार पूरी तरह प्रभावित हुआ था. इस वर्ष भी मधेपुरा जिले में पहले से बने हुए बांध की मरम्मती और मधुबनी में नो मैन्स लैंड में बने बांध की मरम्मती कार्य में नेपाल सरकार द्वारा सहयोग नहीं किया गया.

उन्होंने कहा कि, बिहार के संबंधित अधिकारियों ने नेपाल के अधिकारियों से बातचीत कर समाधान की कोशिश की. लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं दिया. जो मरम्मत कार्य मई में पूरा हो जाना चाहिए था, उसे जून के अंत तक ठीक कराया गया. हमलोगों ने अपनी सीमा क्षेत्र में बांध मजबूती का कार्य किया है. इस स्थिति पर गौर करने की जरुरत है.

बाढ़ प्रभावित परिवारों को 6 हजार की राशि दी जा रही
मुख्यमंत्री ने कहा कि, हमलोग बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवारों को 6 हजार रुपए की राहत राशि पहले से देते आ रहे हैं. जिसमें 3 हजार रुपए अनाज और 3 हजार रुपए कपड़े और अन्य जरुरतों की पूर्ति के लिए देते हैं.  2017 में 2385 करोड़ 42 लाख और  2019 में 2003 करोड़ 55 लाख की ग्रैचुट्स रिलीफ के रुप में राशि लोगों के बीच वितरित की गई है. इस वर्ष अब तक 6 लाख 31 हजार 295 बाढ़ प्रभावित परिवारों के खाते में ग्रैचुट्स रिलीफ की 378 करोड़ 77 लाख की राशि भेज दी गई है.

सीएम ने कहा कि 15 वें वित्त आयोग के द्वारा  2020-21 के लिए स्टेट डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट फंड के लिए 1880 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है. इसमें 20 प्रतिशत स्टेट डिजास्टर मिटीगेशन फंड का प्रावधान है एवं 80 प्रतिशत स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड में विभक्त किया गया है. इसके संबंध में अभी पूरी स्पष्टता नहीं है. इस स्टेट डिजास्टर मिटीगेशन फंड को अलग करने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि, स्टेट डिजास्टर रिस्क फंड में 75 प्रतिशत केंद्र का और 25 प्रतिशत राज्य की राशि का प्रावधान किया गया है. ग्रैचुट्स रिलीफ पर एक बार में 25 प्रतिशत राशि खर्च करने की सीमा तय की गई है. इसे भी समाप्त किया जाना चाहिए. इससे प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रति वर्ष राज्य सरकार के खजाने पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को, कम किया जा सकेगा. हमलोगों को ग्रैचुट्स रिलीफ में काफी खर्च करना पड़ता है.

नीतीश कुमार ने कहा कि, बाढ़ प्रभावितों को ग्रैचुट्स रिलीफ की राशि देने के साथ-साथ राज्य सरकार बांधों की मरम्मत एवं अन्य कार्यो के लिए खर्च करती है. किसानों को भी राहत दी जाती है. उन्होंने कहा कि, 2018 में भी रिलीफ फंड को लेकर प्रधानमंत्री से चर्चा हुई थी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि, गंगा नदी के कारण भी  2016 में 13 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए थे. फरक्का बराज से जल निकासी में अब ज्यादा समय लग जाता है, जिससे गंगा नदी का पानी ज्यादा दिनों तक ज्यादा क्षेत्रों में फैला रहता है. इस पर भी विचार करने की जरुरत है. भारत एवं बंगलादेश के बीच गंगा नदी को लेकर किए गए समझौते के अनुसार, फरक्का बराज पर गंगा नदी का 1500 क्यूमेक सुनिश्चित करना पड़ता है, जबकि गंगा नदी से बिहार में मात्र 400 क्यूमेक जल प्राप्त होता है. शेष 1100 क्यूमेक जल गंगा नदी में बिहार के क्षेत्र से जाता है.

इस प्रकार बिहार में गंगा नदी का जल होते हुए भी राज्य इसका उपयोग नहीं कर पाता है. उन्होंने कहा कि, राष्ट्रीय नदी जोड़ों परियोजना के लिए 2 लाख हेक्टेयर का क्षेत्र लाभांवित होने का दायरा निर्धारित किया गया है. इसके तहत बिहार के कोसी-मेची नदी को राष्ट्रीय नदी जोड़ों परियोजना के अंतर्गत शामिल किया जाए, क्योंकि इससे 2 लाख 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र लाभांवित होगा.

नदियों को जोड़ने से बाढ़ नियंत्रण में मिलेगी मदद
उन्होंने कहा कि, नदी जोड़ने से बाढ़ की संभावना कम होगी और पानी का लोग ज्यादा उपयोग कर सकेंगे. नदियों को जोड़ने से बाढ़ नियंत्रण में भी सहूलियत होगी. उन्होंने कहा कि, केंद्र सरकार द्वारा बाढ़ की स्थिति में एनडीआरएफ की टीम तत्काल उपलब्ध कराई जाती है. हेलीकॉप्टर भी उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे राहत पैकेट एवं अनाज वितरण में काफी सहूलियत होती है, क्योंकि कभी कभी ज्यादा बाढ़ की स्थिति में, नाव के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाना संभव नहीं हो पाता है. उन्होंने कहा कि अन्य जरुरी सहायता भी केंद्र के द्वारा दी जाती रही है.

कोरोना को लेकर सतर्क
मुख्यमंत्री ने कहा कि, एक तरफ हम सभी कोरोना जैसी आपदा से बचाव को लेकर लगातार कार्य कर रहे हैं तो, दूसरी तरफ बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से भी निपटने के लिए कार्य कर रहे हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण की जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है.